जनजातीय नीति पर जल्द विचार करेगा मंत्रिमंडल
जनजातीय मामलों के मंत्री कांतिलाल भूरिया ने मंगलवार को बताया, "इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा। इस नीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके तहत जनजातियों को अपनी भूमि पर पहले से ज्यादा अधिकार मिल सकेगा।"
वैसे यह नीति छह साल से भी अधिक समय से लंबित पड़ी थी। प्रस्तावित राष्ट्रीय जनजातीय नीति का मसौदा वर्ष 2004 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान तैयार किया गया था। लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद मंत्रियों के समूह ने इसे वर्ष 2008 में हरी झंडी दी। इसके बाद से ही यह जनजातीय मामलों के मंत्रालय के विचाराधीन था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नीति से जुड़े मसौदे को इस महीने ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश कर दिया जाएगा। इस नीति का औद्योगिक धड़ा विरोध करता रहा है और इसके लंबित पड़े रहने की मुख्य वजह भी यही है। इस नीति के अमल में लाए जाने के बाद गैर-जनजातीय लोग जनजातीय इलाकों में भूमि नहीं खरीद सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि जनजातियों के लिए भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार पहले ही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया वन्य अधिकार अधिनियम के तहत चल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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