राष्ट्रपति का हरित प्रौद्योगिकी अपनाने पर बल
शंघाई, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने चीन की अपनी छह दिवसीय यात्रा के अंतिम पड़ाव पर रविवार को शंघाई में 2010 वर्ल्ड एक्सपो में भारतीय मंडप का दौरा किया और शहरों को बेहतर बनाने के लिए हरित प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर दिया।
इस मंडप में दुनिया के सबसे बड़े बांस का गुंबद बनाया गया है, जिसमें 60,000 पौधे लगाए गए हैं और इसमें बारिश का पानी एकत्रित करने की भी व्यवस्था है। इस प्रदर्शनी की विषय-वस्तु 'बेहतर शहर-बेहतर जीवन' है। छह महीने तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 30 अप्रैल को किया गया था।
भारतीय मंडप के दौरे के बाद पाटिल ने संवाददाताओं से कहा, "मैं चीन की जनता को इस विषय-वस्तु के आयोजन के लिए बधाई देना चाहती हूं और उनकी सराहना करती हूं। यह जनता के व्यापक हित में है। यह बेहद जरूरी है कि अपने शहर को ऐसे ढंग से बनाया और नियोजित किया जाए कि इंसानों को बेहतर जीवन मुहैया कराया जा सके।"
मंडप का गुंबद बांस से बनाया गया है जिसका व्यास 34.4 मीटर है और यह दुनिया का सबसे विशाल बांस निर्मित गुंबद है। इसमें भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली स्थापत्य शैली की छाप मौजूद है।
पाटील ने कहा, "हमें मिल-जुलकर रहने का संदेश देना होगा। मैंने भारतीय मंडप का दौरा किया है। इसका डिजाइन और स्थापत्य विलक्षण है। हम अनेकता में एकता में यकीन रखते हैं जो बहुलवादी समाज के लिए अत्यावश्यक है।"
राष्ट्रपति ने मंडप के निर्माण में पुनर्चक्रित उत्पादों और हरित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।"
निर्माण में बांस के इस्तेमाल के बारे में राष्ट्रपति ने कहा, "यह हमारे सद्भाव की एक और अनूठी मिसाल है।" इसे भारत और चीन द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन किया गया।
सबसे ज्यादा अनूठी बात यह है कि मंडप की छत पर 60,000 पौधे हैं और बारिश के जलसंग्रहण की व्यवस्था है।
पाटील ने कहा, "भारतीय मंडप भारत के अतीत और वर्तमान तथा विभिन्न क्षेत्रों में हमारी तरक्की की झलक पेश करता है। मुझे उम्मीद है कि यहां आने वाले लोग सद्भाव का संदेश ले जाएंगे।"
इस मंडप में आने वालों की तादाद सभी अनुमानों को पार कर गई है।
भारत व्यापार संवर्धन संगठन के अध्यक्ष एवं महानिदेशक सुभाष पाणी ने बताया, "27 अप्रैल को हमें अनुमान था कि यहां 12000 लोग आएंगे लेकिन 27,000 लोगों को देखकर बेहद खुशी हुई। आजकल रोजाना 30 से 35 हजार लोग आ रहे हैं। एक दिन तो 47 हजार लोग भी यहां आए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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