किसानों के लिए खट्टी साबित हो रही मीठी चेरी

शिमला, 30 मई (आईएएनएस)। इस वर्ष मीठी चेरी की बंपर फसल, हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए खट्टी साबित हो रही है। उच्च उत्पादन के कारण कीमतें इतना नीचे चली गई हैं कि किसान पिछले वर्ष की बनिस्बत 25 से 35 प्रतिशत कम कीमत पा रहे हैं।

बागवानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चेरी का कुल उत्पादन 1,000 टन का रिकॉड छूने के करीब है। पिछले वित्त वर्ष में चेरी का उत्पादन 419 टन और वित्त वर्ष 2007-08 में इसका उत्पादन 698 टन था।

परिणामस्वरूप बाजार की कीमतें बहुत नीचे चली गई हैं, जिसके कारण किसानों को काफी कम आमदनी हो रही है। ऊपरी शिमला के एक प्रमुख किसान गोपाल मेहता ने आईएएनएस को बताया, "चेरी के उच्च उत्पादन के कारण कीमतें काफी नीचे आ गई हैं।"

मेहता ने कहा कि जैविक तरीके से उत्पादित ब्लैक चेरी की सर्वोत्तम किस्म इस वर्ष दिल्ली के थोक बाजार में 230 रुपये से 270 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। जबकि पिछले वर्ष चेरी की यह किस्म 350 से 380 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकी थी।

एक अन्य किसान दीवान नेगी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर जैसे चेरी उत्पादक अन्य राज्यों में चेरी के उच्च उत्पादन के कारण बाजार मंदा हो गया है।

नेगी ने कहा, "हम चंडीगढ़ के थोक बाजार में सामान्य लाल चेरी के एक डिब्बे को 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहे हैं। पिछले वर्ष हमने 150 रुपये से अधिक कीमत पर यही चेरी बेची थी।"

नेगी के अनुसार किसानों को शायद ही कुछ लाभ हो पा रहा हो, क्योंकि मजदूरी, पैकिंग और ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ गई है।

दिल्ली के एक व्यापारी सहजाद मियां ने कहा, "हम नारकंडा से हर रोज उच्च गुणवत्ता वाली चेरी के 500 से 1,000 डिब्बे खरीद रहे हैं। इस वर्ष कीमतें काफी कम हैं।"

शिमला से कोई 65 किलोमीटर दूर स्थित नारकंडा चेरी उत्पादन का केंद्र है। चेरी का उत्पादन मुख्यत: शिमला, कुल्लू, मनाली, चांबा, किन्नौर और लाहौल व स्पीति जिलों के ऊंचाई वाले स्थानों पर होता है। कम से कम 10,000 छोटे किसान वैकल्पिक फसल के रूप में 405 हेक्टेयर भूमि पर चेरी की फसल उगाते हैं।

बागवानी निदेशक गुरदेव सिंह का कहना है कि कुछ किसान बस फसलों की डंपिंग कर रहे हैं।

सिंह ने कहा, "मांग और आपूर्ति जैसी उचित बाजारू प्रक्रिया का अध्ययन किए बगैर किसान अपने उत्पाद को उन बाजारों में भेज रहे हैं, जहां पहले से चेरी की बाढ़ है। चूंकि चेरी को पांच से छह दिनों तक ही रखा जा सकता है, इसलिए किसान अफरातफरी में अपनी फसल बेच रहे हैं।"

राज्य में चेरी का उत्पादन 15 जुलाई तक जारी रहेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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