अवैध मोबाइल टावरों पर फैसला सोमवार को संभव

न्यायाधीश कैलाश गंभीर ने 24 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था अब इस मामले में सोमवार को निर्णय सुनाया जा सकता है। मामला न्यायालय में होने से एमसीडी ने सीलिंग की कार्रवाई रोक दी थी।

एमसीडी के क्षेत्राधिकार में 5,364 मोबाइल टावर हैं। इनमें से बिना अनुमति के लगाए गए 2,952 टावरों को अवैध घोषित किया गया है।

एमसीडी द्वारा नौ फरवरी को घोषित दिशानिर्देशों में टावर लगाने के लिए दूरसंचार कंपनियों द्वारा नागरिक समिति को दी जाने वाली लाइसेंस फीस एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है।

दूरसंचार कंपनियों ने न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा, "एक लाख रुपये की लाइसेंस फीस की घोषणा 20 साल के लिए की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। एमसीडी ने बिना कोई सुविधा बढ़ाए फीस में बढ़ोतरी की है।"

पिछले कुछ महीनों में एमसीडी ने करीब 300 टावर सील किए हैं। दूरसंचार कंपनियों ने एमसीडी की शर्तो के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करते हुए 41 टावरों को दोबारा शुरू किया है।

नागरिक समिति के मुताबिक दूरसंचार कंपनियों को टावरों को नियमित कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया था, यह समय सीमा मई के पहले सप्ताह में समाप्त हो गई।

न्यायालय ने 13 मई को अवैध टावरों की सीलिंग पर 24 मई तक के लिए रोक लगा दी थी। न्यायालय ने नागरिक समिति से पूछा था कि किस आधार पर लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी की गई है।

एमसीडी ने जबाव में एक विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी है जिसमें कहा गया कि नागरिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे इन टावरों को नियमित करना जरूरी है।

न्यायाधीश कैलाश गंभीर एमसीडी के जबाव से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कहा,"आपका जवाब संतोषजनक नहीं है और आप फीस में बढ़ोतरी और इसके लाभ में संबंध दिखाने में असफल रहे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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