यह मेरा दूसरा जन्म है : हादसा पीड़ित
सानू जार्ज
कसरगोडे, 27 मई (आईएएनएस)। मैंगलोर विमान दुर्घटना में बचे आठ लोगों में से एक 47 वर्षीय के. कृष्णन का एक हाथ कंधे से अलग हो गया था। जब वह मनगाड के निकट उडमा स्थित अपने घर पहुंचा तो उसका जांबाज की तरह स्वागत किया गया।
बेसब्री से इंतजार कर रही 72 वर्षीय उसकी मां बेल्लाची ने कहा कि दुर्घटना में 158 यात्रियों की मौत की खबर उसे मिली, लेकिन जब तक वह अपनी आंखों से बेटे का शव नहीं देख लेगी, तब तक उसे अपने भाग्य पर यकीन नहीं होगा।
कृष्णन दुबई से मैंगलोर के लिए उड़े उसी विमान में सवार था जो शनिवार को मैंगलोर से 20 किलोमीटर दूर बाज्पे हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
घर पहुंचने पर बड़ी संख्या में इंतजार में खड़े लोगों को देखकर कृष्णन के आंसू निकल आए। उसके दोस्तों और रिश्तेदारों ने उसे घेर लिया। रोती हुई वेल्लाची ने अपने बेटे को गले से लगाया और उसे चूमते हुए कहा, मेरा बेटा लौट आया है। निश्चित रूप से यह ईश्वर की कृपा है।
मैंगलोर के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौटते समय उसकी पत्नी बिंदु व दो बेटियां आठ वर्षीय कीर्ति और तीन वर्षीय कृपा भी उसके साथ थीं।
दुबई की एक कंपनी में काम करने वाले कृष्णन ने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि यह मेरा दूसरा जन्म है।
दुर्घटना का वर्णन करते हुए कृष्णन ने कहा कि उसे नहीं लगता कि बचने के लिए उसने कोई प्रयत्न किया।
कृष्णन ने कहा, विमान के उतरते समय उसने जोर की आवाज सुनी और सब कुछ अचानक हो गया। मैंने देखा कि मेरे सिर के ऊपर विमान से निकलने का एक रास्ता है और मैं तुरंत झाड़ियों में कूद पड़ा। उसी पल मैंने विस्फोट के साथ आग की लपटें उठते देखा। मैं जान बचाकर किसी तरह वहां से दूर चला गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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