वैज्ञानिकों ने भ्रूण कोशिका से बनाई रेटिना
इस खोज के बाद आंख की बीमारियों को दूर करने के लिए कृत्रिम रेटिना के निर्माण हेतु महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कैलीफोर्निया-इर्विन विश्वविद्यालय में शोधकर्ता समूह के नेतृत्वकर्ता हेन्स केयर्सटीड कहते हैं, "हमने कई कोशिकाओं की मदद से एक जटिल संरचना का निर्माण किया है। रेटिना से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए यह एक महत्वपूर्ण खोज है।"
रीढ़ की हड्डी की चोटों पर इससे पहले किए गए अध्ययनों में केयर्सटीड ने भ्रूण कोशिकाओं को विशेष कोशिकाओं में बदलने की प्रक्रिया की खोज की थी, इस प्रक्रिया को 'डिफरेंशिएशन' कहा जाता है।
इन अध्ययनों के आधार पर रीढ़ की हड्डी की चोटों को दूर करने के लिए पहली बार स्टेम सेल आधारित चिकित्सा पद्धति का चिकित्सकीय अध्ययन किया गया।
केयर्सटीड और उनके सहयोगियों ने अपने ताजा अध्ययन में 'डिफरेंशिएशन' तकनीक का उपयोग रेटिना के लिए जरूरी विभिन्न कोशिकाएं बनाने में किया।
केयर्सटीड ने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इंजीनियरिंग से संबंधित थी। प्राथमिक अवस्था की रेटिना बनाने के प्रारंभिक दौर में शोधकर्ताओं को विशेष तरह के दूरदर्शियों की जरूरत थी।
केयर्सटीड ने कहा, "स्टेम सेल से बना यह अपने तरह का पहला अवयव है।"
रेटिना आंख के पिछले भाग में स्थित वह पर्त होती है जो आंख के लैंस द्वारा एकत्रित की गई रोशनी से बनने वाले चित्रों को विशेष तंत्रिकाओं के जरिए दिमाग तक पहुंचाती है।
रेटिना से संबंधित बीमारियां ज्यादातर इस पर्त के क्षतिग्रस्त होने से होती हैं। 1 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी नजर की कमजोरी से पीड़ित हैं और 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में अंधेपन की यह बड़ी वजह है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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