सड़क से अदालत पहुंची थाईलैंड की सियासी जंग
दो महीने से सरकार विरोधी प्रदर्शनों में जुटे आंदोलनकारियों के खिलाफ थाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई के महज सप्ताह भर बाद सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री और उनके समर्थकों के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी है।
सरकार के प्रवक्ता पनिथम वत्तनायकोर्न का कहना है, "सड़कों पर उतरने से अच्छा विकल्प कानूनी जंग है। यह दर्शाता है कि व्यवस्था फिर से काम कर रही है।"
शिनावात्रा को गिरफ्तार और प्रत्यर्पित कराने के लिए थाई पुलिस अगले सप्ताह इंटरपोल से औपचारिक मदद मांग सकती है। प्रदर्शनों का आयोजन और उन्हें वित्तीय मदद मुहैया कराने में कथित भूमिका की वजह से शिनावात्रा के खिलाफ आतंकवाद का आरोप लग सकता है।
थाईलैंड में दो महीने तक चले विरोध प्रदर्शनों में 88 लोग मारे गए थे और 1885 घायल हो गए थे।
शिनावात्रा के वकीलों ने बुधवार को अदालत में अपील दाखिल कर पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ मंगलवार को जारी हुए गिरफ्तारी के वारंट को रद्द कराने की मांग की थी।
अपने खिलाफ आरोपों के संबंध में शिनावात्रा ने पहली बार प्रकाशित प्रतिक्रिया में गुरुवार को कहा कि उन्होंने रेड शर्ट्स प्रदर्शनकारियों के कथित आंदोलन को प्रायोजित नहीं किया था और इंटरपोल को उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी के वारंट की अनदेखी करनी चाहिए।
आस्ट्रेलियाई प्रसारक एबीसी को दिए साक्षात्कार में शिनावात्रा ने कहा, "हम कभी भी हिंसा में शामिल नहीं रहे। ये आरोप पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और निराधार हैं।..इंटरपोल ने हमेशा थाई सरकार की ओर से दी गई जानकारी को अविश्वसनीय और राजनीति से प्रेरित पाया है।"
शिनावात्रा ने गत 19 मई को प्रदर्शनकारियों द्वारा बैंकाक की इमारतों को आग के हवाले किए जाने संबंधी रपटों को भी गलत बताया है।
शिनावात्रा को फौजी विद्रोह के जरिये 2006 में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। वह इस समय मोंटेनगरो में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं।
इस बीच सरकारी प्रवक्ता पनिथम ने स्वीकार किया है कि विरोध प्रदर्शनों के बाद जनता का विश्वास हासिल करने के लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनों की जांच के लिए एक निष्पक्ष समिति बनाई गई है। उन्होंने बताया कि सरकार को अफवाहों पर काबू पाने के लिए भी काफी कोशिश करनी पड़ रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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