एक पैसे में इतना कुछ?
आप जरूर सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी क्या चीज है जिसकी कीमत है एक पैसा? दरअसल भारत में तेजी से पांव पसारते टेलीकॉम सेक्टर अब मोबाइल पर ऐसी सेवाएं ग्राहकों को उपलब्ध करवा रहे हैं जिनकी कीमत है एक पैसा।
यह प्रस्ताव इस समय जबरदस्त प्रतिस्पर्धा में जुटे भारतीय दूरसंचार उद्योग की ओर से दिया गया था। मात्र एक पैसे में कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी कोने में पूरे एक सेकंड तक बात कर सकता है या भारत के 60 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ताओं में से किसी को भी 160 कैरेक्टर का एक एसएमएस भेज सकता है।
विपणन का नायाब भारतीय फार्मूला
दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाले भारतीय दूरसंचार उद्योग को विपणन के सभी हथकंडे अपनाने का श्रेय हर हाल में दिया जाना चाहिए। इसमें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उत्पाद या सेवा का नमूना तैयार करना, सस्ती दरें तय करना, लाभकारी समय निर्धारित करना, परिवार व मित्रों के लिए विशेष पैकेज का प्रस्ताव आदि शामिल हैं।
इन प्रस्तावों में एक महीने तक 99 रुपये में 15,000 एसएमएस भेजने की सुविधा, यानी मात्र दो पैसे में तीन एसएमएस की सुविधा शामिल है। या फिर 65 घंटे की काल के लिए मात्र 299 रुपये, या पांच रुपये में अपनी मां के साथ पूरे समय बात करने की सुविधा शामिल है। सेवा प्रदाता कंपनी के पास किसी उपभोक्ता से स्थानीय और एसटीडी काल में पैसे बनाने का अवसर न के बराबर है।
लेकिन ये कंपनियां मूल्य वर्धित सेवाओं के जरिए पैसे बनाती हैं। मूल्य वर्धित सेवाओं में रिंग टोन्स व ज्योतिष, म्यूजिक डाउनलोड व जोक्स, क्रिकेट स्कोर के बारे में सूचना, अंतर्राष्ट्रीय काल्स व डाटा सेवाएं शामिल हैं। गिनती करने के बाद पता चलता है कि कम से कम विभिन्न तरह की 100 ऐसी सेवाएं हैं जो कि मूल्य वर्धित सेवाओं को बढ़ावा देती हैं। और ऐसा कोई उपभोक्ता नहीं होगा, जिसने कि कम से कम 15 रुपये मासिक दर पर एक या दो सेवाएं न ला हों।
यह अलग बात है कि भारत के सभी 60 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता ऐसा हैंडसैट नहीं रखते जो कि डाटा सेवाओं के लिए उपयुक्त हो, लेकिन जल्द ही इस तरह के हैंडसैट के हमशक्ल, सस्ते हैंडसैट हर उपभोक्ता की पहुंच में होंगे, जिनका औसत बिक्री मूल्य (एएसवी) किसी विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनी के किसी स्मार्ट फोन का 10वें हिस्से के बराबर होगा।
भारत में सबसे कम दरों पर टेलीकॉम सेवा
भारत में दूरसंचार दरें दुनिया में सबसे निम्न हैं। ये दरें चुपचाप सामाजिक स्तर पर स्पष्ट बदलाव ला रही हैं। आप इसे बस, रेल या विमान में सहज रूप में देख सकते हैं। यहीं दूसरे स्तर पर मोबाइल एयर स्पेस उपभोक्ता भी हैं, जो फोन काल्स को प्रारंभिक डे टाइम एक्टिविटी से पूरे सप्ताह 24 घंटे की एक्टिविटी में बदलने में व्यस्त हैं।
अब वह समय दूर नहीं, जब यह मोबाइल क्रांति, बाकी बचे देश के आधे हिस्से को, हर महीने दो करोड़ नए मोबाइल कनेक्शन उपलब्ध कराते हुए तीन वर्षों से भी कम अवधि के भीतर अपने आगोश में ले लेंगी। उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था का पैमाना भारत की आबादी का लाभ उठाएगा और एक पैसे में कई सारे सेकेंड तक मोबाइल पर बातें करने की सुविधाएं प्रदान करेगा।
(सुजीत चटर्जी, सिंगापुर की मोबाइल वीओआईपी सल्यूशन प्रदाता कंपनी, आरईवीई सिस्टम्स के 'ग्लोबल मार्केटिंग एंड स्ट्रेटजी' निदेशक हैं।)













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