सोरेन को बहुमत साबित करने के लिए 7 दिन का समय (लीड-4)
सोरेन लगभग अपराह्न् 5.30 बजे राज्यपाल से मिलने गए थे। भाजपा द्वारा समर्थन वापसी के बाद राज्यपाल ने उन्हें तलब किया था।
सोरेन ने राज्यपाल के साथ अलग से 15 मिनट तक बातचीत की और बहुमत साबित करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। राज्यपाल इस पर सहमत हो गए।
झामुमो के वरिष्ठ नेता टेकलाल महतो ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया, "झारखण्ड में एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन किया जाएगा।"
इसके पहले भाजपा ने पांच माह पुरानी सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास ने संवाददाताओं से कहा, "हमने शिबू सोरेन सरकार से समर्थन वापस लिया क्योंकि लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता चल रही थी।"
दास सहित भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अर्जुन मुंडा और अन्य नेताओं ने सोमवार को राज्यपाल फारुक से दोपहर में मुलाकात की और समर्थन वापसी का पत्र उन्हें सौंप दिया।
झारखण्ड की 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों के 18-18 विधायक हैं। ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के पांच और जनता दल-यूनाइटेड के दो सदस्य हैं।
दास ने कांग्रेस पर झारखण्ड में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस झारखण्ड में गंदी राजनीति कर रही है। वह सरकार बनने के बाद से ही उसे अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस झामुमो के कुछ विधायकों को कोलकाता और नई दिल्ली ले गई।"
इधर नई दिल्ली में वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा, "हमने प्रभावी तरीके से झारखण्ड में एक गैर कांग्रेसी सरकार सुनिश्चित कराने और उसका नेतृत्व करने की कोशिश की, लेकिन हम सफल नहीं हुए। लिहाजा हमने यह तय किया कि अब बहुत हो चुका।"
जेटली ने कहा, "यह निर्णय पार्टी के संसदीय दल के हर सदस्य के साथ परामर्श व चर्चा करने के बाद रविवार की शाम लिया गया। यह निर्णय सर्वसम्मत से लिया गया।"
झामुमो ने भाजपा को समर्थन वापस लेने से रोकने का अंतिम समय तक प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अर्जुन मुंडा से मिलकर भाजपा को समर्थन वापसी रोकने को कहा।
वरिष्ठ झामुमो नेता हेमलाल मुर्मु ने समर्थन वापसी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
दास के नेतृत्व में भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल एम. ओ. एच. फारूक से भेंट कर उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपा।
समर्थन वापसी से पहले दास ने सुबह आईएएनएस से बातचीत में कहा था, "झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की पैंतरेबाजी ने प्रदेश को राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। पार्टी ने सोरेन सरकार से समर्थन वापसी का फैसला किया है।"
सोरेन के 27 अप्रैल को लोकसभा में भाजपा द्वारा लाए गए कटौती प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने के बाद से ही प्रदेश में राजनीतिक संकट गहराया हुआ है। भाजपा ने 28 अप्रैल को झामुमो से समर्थन वापस लेने की घोषणा की।
दो दिन बाद भाजपा ने समर्थन वापसी के फैसले को स्थगित कर दिया। झामुमो ने आठ मई को भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की। 18 मई को भाजपा की सोरेन के साथ सत्ता साझेदारी के लिए सहमत हो गई।
इसके दो दिन बाद सोरेन ने सत्ता छोड़ने से इंकार कर दिया और घोषणा की कि एक वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों से वार्ता जारी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications