अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री का राजनीतिक अंदाज:रिटायरमेंट से इंकार, राहुल,सोनिया की तारीफ (लीड-2)

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से किसी प्रकार के मतभेद और कांग्रेस संगठन से समन्वय में अभाव की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के अवसर पर विज्ञान भवन में संवाददाताओं से रूबरू प्रधानमंत्री ने उनके सवालों का एक सधे हुए राजनेता के अंदाज में जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद से लेकर नक्सलवाद, सरकार से लेकर संगठन, भ्रष्टाचार से लेकर मंत्रियों की बयानबाजी, तथा निजी जिंदगी से जुड़े सवालों का भी दो टूक जवाब दिया।

आतंकवाद और नक्सलवाद :- प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए उनकी सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को कोई धर्म नहीं होता है। यह सबसे बड़ा खतरा है। नक्सलवाद को आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने इस समस्या को कभी भी कमतर नहीं आंका।

"आपको याद होगा कि मैं हमेशा से ही कहता रहा हूं कि नक्सल समस्या एक बड़ी चुनौती है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि हमारी सरकार ने इस समस्या को कमतर आंका।"

आर्थिक विकास के पूरे लाभ के लिए उन्होंने आतंकवाद और नक्सलवाद पर नियंत्रण बेहद जरूरी बताया और कहा, "आर्थिक सुधारों का फायदा उठाने के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। इनका आर्थिक स्थिति पर खराब असर पड़ता है।"

राहुल का स्वागत, पर रिटायर अभी नहीं :-युवा सांसद व कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि उनके लिए इससे उपुयक्त और क्या हो सकता है। "कैबिनेट में पद के लिए राहुल बहुत ही योग्य हैं।" उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह कई दफा राहुल से चर्चा कर चुके हैं लेकिन उन्होंने हमेशा इसे टाल दिया।

उन्होंने कहा, "राहुल बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। वह कांग्रेस पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।"

इसी से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं कई बार महसूस करता हूं कि युवाओं को देश की बागडोर संभालनी चाहिए। किसी युवा के लिए जगह खाली करने में मुझे बेहद खुशी होगी। लेकिन यह कांग्रेस पर है।"

एक तरफ प्रधानमंत्री ने राहुल का स्वागत किया तो दूसरी ओर उन्होंने यह भी साफ किया कि तब तक उनके सेवानिवृत्त होने का प्रश्न ही नहीं उठता जब तक कि वह खुद को सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर लेते।

उन्होंने कहा, "मुझे एक काम सौंपा गया है, जो अब तक अधूरा है और जब तक वह पूरा नहीं हो जाता तब तक मेरे सेवानिवृत्त होने का प्रश्न ही नहीं होता।"

न सोनिया से मतभेद, न संगठन से समन्वय का अभाव:- प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से किसी प्रकार का मतभेद होने और कांग्रेस संगठन के तालमेल के अभाव से इंकार किया। उन्होंने कहा, "इसमें कोई सच्चाई नहीं है कि मुझमें और सोनिया में कोई मतभेद हैं।"

उन्होंने कहा, "सोनिया गांध संप्रग और कांग्रेस की अध्यक्ष हैं जबकि मैं कांग्रेस का एक सदस्य भर हूं। इसलिए हमारे बीच किसी प्रकार के मतभेद का प्रश्न ही नहीं उठता।"

संगठन से मतभेद के सवाल पर उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी से हर सप्ताह चर्चा होती रहती है, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि सरकार व संगठन में समन्वय का अभाव है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दुरुपयोग और समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से किसी प्रकार के करार की बात से इंकार किया। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को सुपर कैबिनेट मानने से उन्होंने इंकार किया और कहा वह एक सलाहकार संस्था है।

दो महिलाएं :-प्रधानमंत्री ने कहा कि दो महिलाओं- पत्नी गुरशरण कौर और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी- से सलाह लेना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

दरअसल, उनसे जब यह पूछा गया कि वह हमेशा दो महिलाओं (कौर और गांधी) से घिरे रहते हैं। ऐसे में वह किसकी सलाह को अत्यधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि सोनिया गांधी और मेरी पत्नी की सलाह मुझे मिलती है।"

उन्होंने कहा, "दोनों अलग-अलग मुद्दों को निपटाती हैं और मैं दोनों की सलाह का स्वागत करता हूं।"

भ्रष्टाचार और मंत्री:- मनमोहन सिंह ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए.राजा को क्लीन चिट देते हुए कहा कि दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन में अपनाई गई प्रक्रिया सही थी। उन्होंने कहा, "राजा ने पहले से मौजूद नीति को लागू किया।"

"हमारी सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहुत स्पष्ट है। यदि यह पता चलता है कि किसी भी स्तर पर कोई इसमें शामिल है तो हम कदम उठाएंगे।"

मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक मंचों पर विचार प्रकट किए जाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा, "यह ठीक नहीं है। उन्हें कैबिनेट में अपने विचार रखने चाहिए।"

संतुष्ट हूं पर बहुत कुछ करना बाकी:-प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अपने पिछले छह साल के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं लेकिन उन्हें लगता है कि वह और बेहतर कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "हम काफी कुछ कर सकते थे। हमने जो कुछ भी भी सफलता पाई है केवल उसी से हमें संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए। सुधार और बेहतर नतीजों की गुंजाइश हमेशा रहती है।"

जवाबदेही भी स्वीकारी:-देश का प्रधानमंत्री होने के नाते उन्होंने मैंगलोर विमान हादसे और हाल ही में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी भी स्वीकारी। उन्होंने कहा कि देश का प्रधानमंत्री होने के नाते वह संसद तथा देश की जनता के प्रति जवाबदेह हैं।

लंबे अरसे बाद संवाददाताओं से रूबरू हुए प्रधानमंत्री ने अपने संवाददाता सम्मेलन की शुरूआत मैंगलोर विमान हादसे में मारे गए 158 लोगों को श्रद्धांजलि देकर की। दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन भी रखा गया।

पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि नए राज्यों के गठन के मसले पर अभी तक एक आम राय नहीं है। मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 'शून्य सहिष्णुता' (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर चल रही है। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के फांसी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस पर कानून सम्मत कार्रवाई होगी। मुंबई हमले के आरोपी डेविड कोलमैन हेडली के बारे में अमेरिकी प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि हम उससे बात कर सकेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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