जीपीएस सिस्टम को ज्यादा सटीक बनाएगा अमेरिका
फिलहाल इससे भौगोलिक स्थिति जानने में गलती की संभावना 20 फीट की होती है जबकि परिष्कृत जीपीएस में सटीकता की यह क्षमता केवल एक हाथ की लंबाई के बराबर हो जाएगी।
अमेरिकी सेना द्वारा तालिबान के खिलाफ ड्रोन हमले, कोरियर सेवाओं द्वारा परिवहन पर नजर रखने, एटीएम मशीनों की स्थिति जानने से लेकर आम लोगों द्वारा किसी भी क्षेत्र की जानकारी लेने, पता ढूंढ़ने जैसे हर काम के लिए उपयोग किए जा रहे जीपीएस को अब लास एंजेलिस के वायु सेना केंद्र अल सेगुंदो में परिष्कृत किया जा रहा है।
वायु सेना के इसी केंद्र में ब्रेडफोर्ड डब्ल्यू पार्किं सन और उनके सहयोगियों ने 30 साल पहले मौजूदा जीपीएस का निर्माण किया था।
इंटरनेट की तरह दुनियाभर के जीपीएस को भी अमेरिका (पेंटागन) ही नियंत्रित करता है, हालांकि रूस और चीन अपना जीपीएस बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आठ अरब डॉलर की लागत से परिष्कृत किया जा रहा जीपीएस ज्यादा विश्वसनीय, विस्तृत और सटीक होगा। यह सिस्टम लक्ष्य वस्तु की सही भौगोलिक स्थिति बताने में सक्षम होगा। इसमें गलती की संभावना केवल एक हाथ की दूरी के बराबर रह जाएगी। मौजूदा जीपीएस में गलती की संभावना 20 फीट तक की होती है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा जीपीएस को बदलने के लिए 24 नए उपग्रह स्थापित किए जाएंगे इनमें से पहले उपग्रह का प्रक्षेपण इसी सप्ताह केप केनेवरल से किया जाएगा।
मौजूदा जीपीएस में आकस्मिक बाधा के कारण अमेरिका में बिजली, संचार और आपात सेवाएं प्रभावित होती हैं। धरती से 12,000 मील की ऊंचाई से सिग्नल मिलने की वजह से भविष्य में इस तरह की बाधाएं दूर हो जाएंगी।
तीन दशक पहले जीपीएस विकसित करने वाले सेना के कर्नल ब्रेडफोर्ड डब्ल्यू पार्किं सन कहते हैं, "जीपीएस की अद्वितीय उपयोगिता को अभी कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है जबकि यह सचमुच दुनिया का प्रकाश स्तंभ बन गया है। पिछले 30 सालों में इसका विकास अनूठा है लेकिन अगले 30 सालों में इसकी उपयोगिता को देखना काफी रोमांचक होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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