13 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट फतह
काठमांडू, 22 मई (आईएएनएस)। जब एक 13 वर्षीय अमेरिकी छात्र ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने का निर्णय लिया था तो उसकी हर कहीं आलोचना हुई थी लेकिन शनिवार को इस छात्र ने आलोचकों को गलत साबित कर दिया। वह विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई करने वाला सबसे युवा पर्वतारोही बन गया है।
कैलीफोर्नियाई जॉर्डन रोमेरो ने शनिवार को एवरेस्ट पर फतह हासिल की। उसने तिब्बत के रास्ते यह चढ़ाई शुरू की थी। सबसे पहले 23 मई, 1953 को सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे शेरपा ने एवरेस्ट फतह की थी।
जॉर्डन के ब्लॉग में कहा गया है, "अब उनके सपने पूरे हो रहे हैं। हर कोई बहुत खुश है। वह अपनी यात्रा के दौरान उन्हें समर्थन देने वाले और उन्हें उत्साहित करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के शुक्रगुजार हैं।"
डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित हुए एक वृत्तचित्र से प्रेरित होकर जॉर्डन ने बहुत कम उम्र में ही पहाड़ों पर चढ़ाई शुरू कर दी थी। उन्होंने केवल 10 वर्ष की उम्र में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट क्लिीमैनजारो पर चढ़ाई की थी।
इसके बाद से ही उनका सातों महाद्वीपों की सात ऊंची चोटियां फतह करने का सपना था।
जॉर्डन को एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए उनके पिता पॉल रोमेरो और उनकी मित्र करेन लंडग्रेन ने प्रशिक्षित किया था। यद्यपि अब तक उनके पिता और मित्र को भी इस चढ़ाई में शामिल होने का पता नहीं चला है।
इससे पहले सबसे युवा पवर्तारोही का खिताब मिंग कीपा शेरपा के नाम था। उन्होंने 2003 में 15 साल की उम्र में एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी।
बारहवीं कक्षा के दिल्ली के रहने वाले भारतीय छात्र अर्जुन वाजपेयी ने भी उसी दिन चढ़ाई शुरू की थी जिस दिन जॉर्डन ने की थी लेकिन उन्होंने नेपाल से यह चढ़ाई शुरू की थी। अर्जुन एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाले सबसे युवा भारतीय बन गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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