श्रीलंका ने सुलह आयोग का गठन किया
अधिकारियों ने कहा कि आयोग का गठन ऐसे समय में किया गया है, जब श्रीलंका अलगाववादी तमिल विद्रोहियों के खिलाफ चले 26 वर्षो के युद्ध के अंत की पहली बरसी मना रहा है।
आयोग को केवल फरवरी 2002 के बाद की घटनाओं की जांच का अधिकार दिया गया है। वर्ष 2002 में ही विफल संघर्ष विराम लागू हुआ था।
पूर्व महान्यायवादी चित्त रंजन डी सिल्वा के नेतृत्व वाले आयोग को अधिकार दिया गया है कि वह नस्लीय झगड़े में पीड़ित लोगों के लिए या पीड़ितों के आश्रितों के लिए मुआवजे के तरीके सुझाए।
अगले छह महीनों के भीतर, यह आयोग इस तरह के किसी झगड़े की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक और विधायी सुझाव देगा और श्रीलंका के नस्लीय समुदायों में राष्ट्रीय एकता व सुलह को बढ़ावा देने के लिए भी सुझाव देगा।
आयोग का गठन तब किया गया है, जब संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने युद्ध के अंतिम चरणों में हुए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की समीक्षा करने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि 19 मई को विद्रोहियों के नेता वेलु पिल्लई प्रभाकरन को मारे जाने के पहले युद्ध के अंतिम महीनों में 7,500 नागरिक मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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