हिमाचल को कचरे से आजादी दिला रही हैं जूडी
धर्मशाला, 16 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मेक्लॉयडगंज की वादियों में ब्रिटिश नागरिक जूडी अंडरहिल के लिए हर सुबह एक जैसी होती है। स्वयंसेवकों की टोली के साथ मिलकर कचरे को बीनती है। वह इस वादी को प्रदूषण के दुष्चक्र से बचाने की कोशिश में जुटी हैं।
जूडी बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा की शिष्या हैं और गांधीवाद को बेहतर समझती और सहेजती हैं। धरती को खूबसूरत बनाए रखने की इस मुहिम में अब जूडी के अपने कई शिष्य बन गए हैं जो उनका साथ दे रहे हैं।
जूडी कहती हैं, "यह प्रदेश जैव विविधता भरा है लेकिन लोग खासकर पर्यटक इसकी खूबसूरती को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। वे हर जगह कचरा फैला रहे हैं।"
जूडी इस कस्बे में जनवरी में तिब्बती बच्चों को पढ़ाने के लिए आईं थी लेकिन जब उन्होंने यहां कचरे के ढेर देखे तो वे इन्हें साफ करने में जुट गईं।
उन्होंने कहा कि हर सोमवार और मंगलवार को वे लोग इस कस्बे में पहुंचने वाले रास्ते 'तिरुं द' की ओर आते हैं। हफ्ते भर में हम इस नौ किलोमीटर के इलाके से करीब 35 बोरे कचरा इकट्ठा करते हैं, इसमें पानी और शराब की बोतलें, खाने का सामान, पुराने टेंट और कपड़े होते हैं।
जूडी कहती हैं कि हमारे इकट्ठे किए गए कचरे में 70 फीसदी प्लास्टिक की बोतलें होती हैं।
उन्होंने बताया कि कचरा इकट्ठा करने के दौरान वे हमेशा लोगों को जैव और अजैविक कचरे के सुरक्षित निस्तारण के संबंध में जागरुक करती हैं।
स्थानीय निवासी रवि कुमार कहते हैं कि एक समय यह पूरा क्षेत्र कचरे से भर उठा था अब काफी साफ-सुथरा और नजर आने लगा है। लोगों में कचरे का निस्तारण करके अपने इलाके को खूबसूरत बनाने को लेकर रुचि पैदा हो रही है।
जूडी उम्मीद जताती हैं कि धरती को जो नुकसान हुआ है उसे तो बदला नहीं जा सकता लेकिन हम भविष्य के लिए नवीनीकरण, दोबारा इस्तेमाल और उपभोग में कमी का हुनर सीख सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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