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करकरे की मौत की जांच संबंधी याचिका खारिज

याचिका में मांग की गई थी कि करकरे की मौत से पहले की घटनाओं की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक स्वतंत्र तथ्यान्वेषक समिति गठित की जाए।

न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति सुरिंदर सिंह निज्जर की खण्डपीठ ने राधाकांत यादव की जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी, लेकिन अदालत ने उन्हें उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की छूट दे दी।

बिहार से तीन बार विधायक रहे यादव ने चूंकि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में यह याचिका दायर की थी, लिहाजा सर्वोच्च न्यायालय ने उनसे सवाल किया कि आखिर उनके मौलिक अधिकार का किस तरह हनन हुआ है।

ज्ञात हो कि अनुच्छेद 32 के तहत भारत का कोई भी नागरिक मौलिक अधिकारों सहित अपने अधिकारों की हिफाजत के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि मुंबई हमले के दौरान एटीएस प्रमुख करकरे जैसे अधिकारियों की मौत सहित देश के नागरिकों को आतंकियों से बचाने में राज्य बुरी तरह विफल साबित हुअा है।

याची ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख एस.एम.मुशरिफ द्वारा लिखी पुस्तक 'हू किल्ड हेमंत करकरे' का जिक्र किया है। पुस्तक में कहा गया है कि एटीएस प्रमुख की मौत के लिए सरकार द्वारा दी गई व्याख्या न तो तर्कसंगत है और न विश्वसनीय ही।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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