पंचायतों में ओबीसी आरक्षण वैध : सर्वोच्च न्यायालय

अदालत ने यह भी कहा कि इन संस्थाओं के अध्यक्ष पद को सरकारी नौकरियों में एकल पदों के समकक्ष नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 243-डी (6) और अनुच्छेद 243-टी (6) इसलिए संवैधानिक रूप से वैध हैं, क्योंकि इसके प्रावधान कुछ इस तरह के हैं, जो राज्य विधानसभाओं को इस बात के लिए अधिकृत करते हैं कि वे पिछड़े वर्गो के पक्ष सीटों तथा अध्यक्ष के पदों को आरक्षित करें।

सर्वोच्च न्यायालय ने जाति आधारित जनगणना का भी स्पष्ट तौर पर पक्ष लिया। अदालत ने कहा कि राज्य विधानसभाओं के तहत पिछड़ी जातियों को दिए गए आरक्षण की मात्रा को अधिक बताए जाने के दावों का परीक्षण नहीं किया जा सकता, क्योंकि 'समकालीन अनुभवजन्य आंकड़े' मौजूद नहीं हैं।

अदालत ने कहा, "यह शासन की जिम्मेदारी है कि वह पिछड़ेपन की प्रवृत्ति का पता लगाने के लिए एक गहन जांच-पड़ताल कराए। क्योंकि यह प्रवृत्ति राजनीतिक भागीदारी के रास्ते में रोड़ा बना हुआ है।"

अदालत ने कहा, "हमारी राय यह है कि अनुच्छेद 243-डी (6) और अनुच्छेद 243-टी (6) के तहत पिछड़े वर्गो की पहचान, अनुच्छेद 15 (4) के उद्देश्य के लिए एसईबीसी की पहचान तथा अनुच्छेद 16 (4) के उद्देश्य के लिए पिछड़े वर्गो की पहचान अलग होनी चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+