टैगोर की 150वीं जयंती पर शुरू हुए समारोह (लीड-1)
राज्य भर में हुए विविध समारोहों में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। विश्व भारती विश्वविद्यालय के चारों ओर देश और दुनिया से सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हुए।
बीरभूम जिले में स्थित शांतिनिकेतन में समारोहों की रंगविरंगी शुरुआत हुई।
टैगोर द्वारा 1921 में स्थापित यह विश्वविद्यालय पौ फटने के साथ ही मर्मस्पर्शी गीतों से गूंज उठा। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अपने गीत गुनगुनाते हुए पूरे परिसर का चक्कर लगाया।
उसके बाद सभी लोग चातिमताला पर इकट्ठा हुए। इसी जगह टैगोर के पिता देबेंद्रनाथ ने चातिम के पेड़ के नीचे 1863 में एक आश्रम स्थापित किया था। सभी ने प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर टैगोर द्वारा रचित कई सारे भक्तिमय गीतों को लोगों ने मिल कर गाया।
विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट विभाग के कला भवन में स्थित नंदन कला दीर्घा में टैगोर की पेंटिंग्स की एक प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। इसके बाद रवींद्र भवन संग्रहालय में एक छाया चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ।
कुलपति रजत कांता रॉय ने विश्वविद्यालय के दूसरे परिसर, श्रीनिकेतन में ग्रामीण पुनर्निर्माण विभाग में एक कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया। शाम को टैगोर की प्रसिद्ध नृत्य नाटिका 'तासेर देश' का गौर प्रांगण में मंचन किया गया।
दूसरी ओर कोलकाता में पौ फटने के साथ ही समाज के हर तबके के लोग टैगोर को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए उत्तरी कोलकाता स्थित उनके पैतृक घर, जोरासान्को ठाकुरबाड़ी में कतारबद्ध हो गए।
टैगोर के प्रशंसकों ने उस कमरे का दर्शन किया, जहां वह 1861 में पैदा हुए थे। इसके साथ ही इमारत के अहाते में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। इस इमारत में फिलहाल रवींद्र भारती संग्रहालय स्थित है।
सैबल रॉय नामक एक दर्शक ने कहा, "रवींद्र जयंती के दौरान प्रत्येक वर्ष मैं अपने परिवार और मित्रों के साथ जोरासान्को आता हूं।"
यह संग्रहालय रवींद्र भारती विश्वविद्यालय का हिस्सा है और यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आए।
राज्य सरकार ने अपना मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम रवींद्र सदन में आयोजित किया। यहां गायकों, नर्तकों और वक्ताओं ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को बांधे रखा।
टैगोर की 150वीं वर्षगांठ के लिए बनी आयोजन समिति ने प्रभात फेरियों का आयोजन किया। इसमें स्कूली बच्चों और वयस्कों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी टैगोर के गीत गुनगुना रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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