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    विधायक दल की बैठक में होगा मुख्यमंत्री का फैसला (लीड-1)

    By Staff
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    संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अनंत कुमार ने कहा, "मंगलवार को रांची में विधायक दल की बैठक होगी। बैठक में नेता का चुनाव होगा। संसदीय बोर्ड ने तय किया है कि इस बैठक में बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह के अलावा खुद मैं हिस्सा लूंगा।"

    उल्लेखनीय है कि पहले ही यह तय हो चुका है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद जो भी नया मुख्यमंत्री होगा वह भाजपा का होगा।

    मुख्यमंत्री के नाम पर भाजपा खेमों में बंटी हुई है। एक खेमा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री पद पर बैठाना चाहता है तो दूसरा खेमा रघुबर दास को। एक अन्य खेमा भी है जो यशवंत सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत कर रहा है। इन तीनों में से यदि किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई तो इसका लाभ एक अन्य जनजातीय नेता नीलकंठ मुडा को मिल सकता है।

    किसकी दावेदारी कितनी मजबूत, एक नजर में:-

    अर्जुन मुंडा :- राज्य के प्रमुख जनजातीय नेता। पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए अनुभव का लाभ उन्हें मिल सकता है। छवि साफ सुथरी न होना और लोकसभा सदस्य होना इनके खिलाफ जा सकता है। क्योंकि पार्टी के रणनीतिकार किसी विधायक को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। संघ के एक बड़े पदाधिकारी और पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह उनके पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं।

    यशवंत सिन्हा :- साफ सुथरी छवि, केंद्रीय मंत्री के रूप में लंबा अनुभव और विकास की छवि इनका सशक्त पक्ष है लेकिन पार्टी के रणनीतिकार चाहते हैं कि उनके अनुभव व उनकी वाकपटुता का लाभ केंद्र में लिया जाए। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी हालांकि सिन्हा के पक्ष में बताए जाते हैं। उनका तर्क है कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात और नीतीश कुमार ने बिहार में विकासोन्मुखी मुख्यमंत्री की जो छवि बनाई है, झारखण्ड में वैसी ही छवि सिन्हा भी बना सकते हैं। जनजातीय न होना और सांसद होना उनके खिलाफ जाता है।

    रघुबर दास :- इनकी छवि साफ सुथरी और समर्पित कार्यकर्ता की है। उपमुख्यमंत्री और विधायक हैं, इसलिए इसका लाभ इन्हें मिल सकता है। केंद्र में अरूण जेटली व अन्य इनके पक्ष में हैं।

    नीलकंठ मुंडा :- उस परिस्थिति में मुंडा की दावेदारी मजबूत हो जाती है कि जब किसी जनजातीय को ही मुख्यमंत्री बनाए जाने पर एकमत हो। अर्जुन मुंडा के विकल्प में उन्हें देखा जा रहा है। अनुभवहीन होना उनके लिए नकारात्मक हो सकता है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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