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मुकदमों को कम खर्चीला बनाएं : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

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    इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने लंबित पड़े मामलों को घटाने का भी आग्रह किया। सिंह ने कहा न्याय में देरी का मतलब न्याय न मिल पाना होता है।

    बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) द्वारा 'कानून और शासन' विषय पर आयोजित स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "न्याय में देरी का मतलब न्याय न मिलना होता है। इसलिए अदालतों में लंबित पड़े मामलों को निपटाने और न्याय को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में बार एसोसिएशन, न्यायपालिका और सरकार को मिल कर प्रयास करने होंगे।"

    प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक कम खर्च में आम आदमी को न्याय सुलभ नहीं हो जाता, तब तक न्यायिक समानता की अवधारणा को साकार नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी जेलों में बंद बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदियों के दुख को देश में शासन की गुणवत्ता सुधारने की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में तेजी के साथ सुधारात्मक कदमों के जरिए दूर किया जाना चाहिए।"

    प्रधानमंत्री ने न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों के स्पष्ट सीमांकन किए जाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के इन तीनों स्तंभों को एक-दूसरे का सम्मान करने का भी आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसी व्यवस्था है कि देश के तीनों स्तंभों में से कोई भी संविधान द्वारा प्रदत्त उनके अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करेगा, वह चाहे न्यायपालिका हो, विधायिका हो या कार्यपालिका।"

    मनमोहन सिंह ने कहा कि कानून बिरादरी की भूमिका सिर्फ अदालतों तक या मुवक्किलों को सलाह देने तक ही सीमित नहीं है।

    सिंह ने कहा, "यह बिरादरी हमारी न्यायिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा होते हुए हमारी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था का भी हिस्सा है। हमारे संविधान के प्रस्तावना में ऐसा लिखा हुआ है।"

    प्रधानमंत्री ने बार एसोसिएशन से आग्रह किया कि उसे चुनावों को फंडिंग और कानून व शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर फलदायी चर्चाओं का आयोजन करना चाहिए।

    सिंह ने कहा, "कानून बिरादरी की भूमिका सिर्फ अदालतों और अपने मुवक्किलों के मामले निपटाने तक सीमित नहीं है। उन्हें न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग बने रहने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।"

    उन्होंने कहा, "इस बिरादरी के सदस्यों ने पूर्व में इन क्षेत्रों में ऐतिहासिक योगदान दिया है। चाहे वह आजादी की लड़ाई हो या संविधान का निर्माण या फिर सरकार की कार्यप्रणाली हो। यहां तक कि आज भी उनके मंत्रिमंडल में इस बिरादरी के कई प्रमुख लोग शामिल हैं।"

    सिंह ने कहा, "जन कल्याण और राष्ट्रीय हित में कानून बिरादरी अहम भूमिका निभा सकती है।" लातूर और भुज में आए भूकंप और सुनामी तथा कारगिल युद्ध के दौरान बार एसोसिएशन की ओर से किए गए योगदानों के लिए सिंह ने उसकी सराहना भी की।

    इस अवसर पर कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली ने कहा कि न्यायिक सुधार के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार देश में ई-अदालतों की स्थापना की योजना बना रही है। एक साल के भीतर देश भर में प्रत्येक उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में एक-एक ई-अदालतें स्थापित कर दी जाएंगी।

    प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन ने कहा कि कुछ समय से राज्य की भूमिका काफी बदल गई है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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