मक्का मस्जिद धमाके की जाँच में तेज़ी

मक्का मस्जिद धमाके की जाँच में तेज़ी

उमर फ़ारूक़

बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

एक तरफ़ राजस्थान पुलिस अजमेर बम धमाके के सम्बन्ध में गिरफ्तारियाँ कर रही हो, तो दूसरी ओर मक्का मस्जिद धमाके की छानबीन में भी जैसे एक नई जान सी आ गयी है.

हैदराबाद की घटना की जांच करने वाले केंद्रीय जाँच ब्यूरो या सीबीआई का एक दल डीआईजी अशोक तिवारी के नेतृत्व में जयपुर पहुँच गया है जो देवेंदर गुप्ता, चन्द्रशेखर और विष्णु प्रसाद से पूछताछ करेगा.

सीबीआई प्रमुख अश्विनी कुमार ने राजधानी दिल्ली में कहा है कि अजमेर और मक्का मस्जिद धमाकों के तार आपस में जुड़े हुए हैं.

दोनो घटनाओं में कई समानताओं के कारण सीबीआई का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ.

हैदराबाद धमाका 18 मई 2007 को हुआ था और अजमेर का धमाका 11 अक्टूबर 2007 को हुआ.

इन दोनों घटनाओं में बम धमाकों के लिए मोबाइल फ़ोन को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया.

दोनों ही स्थानों पर दो बम रखे गए और उनमें से केवल एक फट सका.

अजमेर में जो बम नहीं फटा उससे मिले सिम कार्ड की मदद से ही राजस्थान पुलिस का आतंकवाद विरोधी दस्ता यानि एटीएस देवेंदर गुप्ता तक पहुँच सका.

गुप्ता की पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता के रूप में की गयी है.

सूत्रों के अनुसार देवेंदर गुप्ता ने राजस्थान पुलिस के सामने इस बात को स्वीकार किया है कि हैदराबाद और अजमेर धमाकों में जो सिमकार्ड इस्तेमाल किए गए वो उन 11 कार्डों में थे जो उन्होंने झारखण्ड में बाबूलाल यादव के नाम से नकली दस्तावेज़ की सहायता से ख़रीदे थे.

जिस तरह के बम और विस्फ़ोटक इन दोनों घटनाओं में उपयोग किए गए वो भी एक जैसे ही थे.

हिंदू चरमपंथियों का हाथ

केंद्रीय जांच ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार यह निश्चित होता जा रहा है कि न केवल इन दोनों घटनाओं में हिन्दू चरमपंथियों का हाथ हो सकता है, बल्कि उनका संबंध मालेगांव धमाकों की अभियुक्त प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित और अन्य लोगों से भी हो सकता है.

इसी कारण एक बार फिर सीबाआई का ध्यान अभिनव भारत संगठन पर केन्द्रित है.

सीबीआई का एक और दल पिछले हफ़्ते नासिक गया था जहाँ उसने मालेगांव धमाकों के अभियुक्तों से फिर पूछताछ की.

हालाँकि राजस्थान पुलिस या सीबीआई अधिकारयों ने मक्का मस्जिद धमाकों के बारे में कोई बात औपचारिक रूप से नहीं कही है लेकिन राजस्थान के गृह मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने मीडिया से कहा है कि देवेंदर गुप्ता से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद कई बड़े खुलासे होने वाले हैं.

राजस्थान पुलिस अभी कुछ और बड़े लोगों को ढूंढ रही है.

सीबीआई सूत्रों ने कहा है कि देवेंदर गुप्ता को जल्द ही हैदराबाद लाया जायेगा और पूछताछ की जाएगी.

धमाके

मक्का मस्जिद में हुए धमाके में छह लोग मारे गए थे.

जब उत्तेजित मुसलमानों की भीड़ बाहर निकली तो पुलिस फ़ायरिंग में नौ और लोग मारे गए.

घटना के तुरंत बाद हैदराबाद पुलिस अधिकारयों ने इस घटना की ज़िम्मेदारी लश्कर-ए-तैबा और हरकतुल जिहाद-इ-इस्लामी जैसे संगठनों पर डाल दी और कहा कि उन्हें एक लापता चरमपंथी शाहेद बिलाल पर संदेह है.

बाद में आंध्र प्रदेश सरकार ने इस केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी, लेकिन गत डेढ़ सालों से यह जाँच ठंडे बस्ते में पड़ी थी.

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि पाकिस्तान में शाहेद बिलाल के मारे जाने के बाद इस केस के तमाम सुराग ठंडे पड़ गए हैं, इसलिए यह जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है.

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