भारतीय युवाओं में लोकप्रिय हिटलर?

भारतीय युवाओं में हिटलर की लोकप्रियता
ज़ुबैर अहमद

बीबीसी संवाददाता, मुंबई

गाँधी के भारत में हिटलर की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. जर्मन तानाशाह भारतीय युवा के हीरो बनते जा रहे हैं. अगर ऐसा कोई कहे तो विश्वास नहीं होता लेकिन यह अब एक कड़वा सच होता जा रहा है.

हिटलर के नाम से टी-शर्ट, बैग और चाभी के छल्ले जैसे सामान कई शहरों में आम तौर से साधारण दुकानों में बड़ी संख्या में बिक रहे हैं. लेकिन सबसे ज्यादा बिकने वाली है उनकी आत्मकथा मॉयन काम्फ़ (Mein Kampf). जैको नामक एक प्रकाशन कंपनी भारत में इस किताब को छापने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. इसने वर्ष 2000 से अब तक मॉयन काम्फ की एक लाख से अधिक किताबें बेची हैं.

क्रॉसवर्ड पुस्तक भंडार की देश भर में कई शाखाएं हैं. इसके मार्केटिंग मैनेजर शिवराम बालाकृष्णन के अनुसार क्रॉसवर्ड ने पिछले दस बरस में अब तक 25,000 से ज्यादा मॉयन काम्फ की प्रतियां बेचीं हैं. बालाकृष्णन कहते हैं: "यह पुस्तक सालों से सबसे ज्यादा बिकने वाली कुछ किताबों में से एक है."

किताब की बढ़ती मांग

नई किताबों को बेचने के लिए भी बहुत कोशिश करनी पड़ती है लेकिन यह किताब किसी प्रचार के बिना ही बिकती है. दिलचस्प हकीकत यह है कि अब मेन कम्फ की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. जैको के मुख्य संपादक आरएच शर्मा कहते हैं: “इस किताब की बिक्री में हर साल दस से पन्द्रह प्रतिशत की वृद्धि हो रही है."

दो साल पहले तक मुंबई की किसी भी पुस्तक भण्डार में इस किताब की 40-50 से ज़्यादा प्रतियाँ नहीं बिकती थीं. अब हर वर्ष 300 प्रतियों से ज्यादा बिकती है. जितना पढ़ा लिखा और अमीर मोहल्ला उतनी ही ज्यादा बिक्री. उदाहरण के तौर पर मुंबई के बांद्रा इलाके में क्रॉसवर्ड की एक शाखा में हर दिन मॉयन काम्फ की तीन प्रतियां बिकती हैं.

चार अलग-अलग संस्करण

मॉयन काम्फ की बढ़ती हुई लोकप्रियता का हाल इससे भी जाना जा सकता है कि इस किताब के अब चार अलग-अलग संस्करण उपलब्ध हैं.मानीज़ बुकसेलर पुणे का एक बड़ा पुस्तक भण्डार है जहाँ मॉयन काम्फ के अलावा हिटलर पर छपी अनेक किताबें भी खूब बिकती हैं.

बढ़ती मांग को देखते हुए अब जैको के अलावा इस किताब को छापने के काम में सात और कंपनियाँ शामिल हो गयी हैं . नाज़ी नेता की किताब ही नहीं लोकप्रिय है बल्कि उनके नाम के साथ टी-शर्ट, बैग और चेन भी खूब बिकते हैं. पुणे में टीन नामक एक दुकान में हर महीने लगभग सौ टी-शर्ट बिकते हैं.

लगभग सभी पुस्तक भण्डार और प्रकाशन कंपनियां मानती हैं कि मॉयन काम्फ को खरीदने वालों में अधिकतर युवा हैं. प्रयाग ठक्कर जिनकी उम्र 19 साल है, अहमदाबाद के एक कालेज में विद्यार्थी हैं, साथ ही हिटलर और उनकी किताब मॉयन काम्फ के एक बड़े प्रशंसक भी. उनका कहना है, “जब से मैंने होश संभाला और इतिहास पढ़ना शुरू किया, तभी से हिटलर के अनुशासन के कारण उनको अपना हीरो माना है."

डिम्पल कुमारी पुणे में रिसर्चर हैं. उन्होंने मॉयन काम्फ पढ़ी भी नहीं है लेकिन हिटलर को एक लीजेंड मानती हैं. छात्रा शिल्पा गुहा ने हिटलर की किताब पढ़ी है वो हिटलर को तारीफ़ के काबिल मानती हैं.

इन सभी युवाओं ने यह स्वीकार किया कि यहूदियों पर ज़ुल्म और 60 लाख यहूदियों की हत्या हिटलर पर एक ऐसा कलंक है जो कभी नहीं मिटेगा. लेकिन वो सभी उनके नकारात्मक पहलू को देखने के बजाए सकारात्मक पक्ष देखना चाहते हैं.

युवाओं का हीरो

गोविन्द कुलकर्णी एक रिसर्च स्कॉलर हैं. उनके अनुसार युवाओं को एक हीरो चाहिए और कोई लीडर बहुत देश प्रेमी और अनुशासित हो तो उससे एक युवा का प्रभावित होना कोई अजीब बात नहीं. हिटलर में यह सब खूबियाँ हैं इसीलिए वे उसे हीरो मानते हैं.

क्रॉसवर्ड के बालाकृष्णन का कहना है कि विद्यार्थियों को कॉलेज और स्कूल में हिटलर की किताब पढ़ने को कहा जाता है. इसलिए युवा इस किताब को खरीद रहे हैं. लेकिन अगर ऐसा सही होता तो उनके नाम से टी-शर्ट, बैग और चाभी के छल्ले इत्यादि का बिकना समझ में नहीं आता.

प्रयाग ठक्कर इसका जवाब कुछ ज्यादा सही से देते हैं: "हिटलर एक बहुत ही धैर्य और हिम्मत वाले इंसान थे. उन्होंने जर्मनी की पूरी जनता को अपनी बोलने की कला से अपने आगे झुका दिया." ठक्कर की तरह दूसरे युवा भी कहते हैं कि भारत को हिटलर जैसे नेता की ज़रुरत है और शायद यही राज है हिटलर और उनकी किताब की लोकप्रियता का.

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