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शंकराचार्य बनाम वन मंत्री विवाद पर विराम!

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    नरसिंहपुर जिले की सांकल गुफा का धार्मिक महत्व है और इसका उल्लेख कई धार्मिक गं्रथों में है। इसी के चलते गुफा के संरक्षण के लिए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उस क्षेत्र में निर्माण कार्य कराया है।

    उनका आरेाप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने गुफा में तोड़फोड़ की हैं। इस पर वन मंत्री ने शंकराचार्य और उनके समर्थकों द्वारा किए गए कार्य को अतिक्रमण बताया था।

    दोनों ओर से शुरू हुए आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया था और सरताज सिंह की मुश्किलें बढ़ने लगी थी। विवाद आगे बढ़े इससे पहले ही वन मंत्री सरताज सिंह ने शुक्रवार को पहल करते हुए शंकराचार्य से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। सरताज सिंह का कहना है कि सांकल गुफा सभी की आस्था का केंद्र है और वन विभाग के मंडलाधिकारी की वजह से भ्रम की स्थिति निर्मित हुई थी। गुफा में तोड़फोड़ की बात सही पाए जाने पर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि गुफा को बचाने के लिए उनके प्रयास जारी रहेंगे, जहां तक इसके लिए आवेदन देने की बात है, उन्हें ऐसा करने में हर्ज नहीं है।

    शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और वन मंत्री के बीच हुई वार्ता से लगता है कि इस विवाद पर अब विराम लग जाएगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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