यौन शोषण के खिलाफ कानून के समर्थन में उठे अवाज
हाल के एक आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) कामिनी लॉ ने अल्पवयस्क बेटी के साथ बलात्कार करने वाले एक पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए कहा था कि ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाए, इसके पहले हमें इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हमारे समाज में परिवार के भीतर यौन शोषण जैसी बुराइयां मौजूद है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अदालत के इस सुझाव का स्वागत किया है और कहा है कि यदि इस तरह का कोई कानून अस्तित्व में आता है, तो परिवार के सदस्यों द्वारा यौन शोषण जैसी प्रवृति से दृढ़ता से निपटा जा सकता है।
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की रंजना कुमारी ने आईएएनएस को बताया, "एक समाज के रूप में हम इन जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं। एक अलग कानून इस समस्या से निपटने में हमारी मदद करेगा।"
एक गैर सरकारी संगठन 'राही' (रिकवरिंग एंड हीलिंग फ्रॉम इनसेस्ट) की कार्यकारी निदेशक अंजना गुप्ता ने बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ एक सख्त कानून की आवश्यकता पर जोर दिया है।
गुप्ता ने कहा, "बाल यौन शोषण के लिए सैंद्धांतिक रूप में कोई कानून नहीं है। एक अलग कानून से इस समस्या की एक स्पष्ट पहचान होगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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