जेसिका हत्याकांड : मनु शर्मा का उम्रकैद बरकरार (राउंडअप)

जेसिका की अप्रैल, 1999 में दिल्ली के एक पब में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। न्यायमूर्ति पी. सथशिवम और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने सोमवार को मनु शर्मा की याचिका को खारिज करते हुए उसे इस मामले में दोषी माना है।

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व राज्यसभा सदस्य डी.पी.यादव के बेटे विकास यादव और बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यकारी अमरदीप सिंह गिल उर्फ टोनी गिल की सजा को भी करकरार रखा है।

शर्मा को जहां जेसिका की गोली मार कर हत्या करने के आरोपों में सजा सुनाई गई थी, वहीं यादव और गिल को सबूतों को नष्ट करने और शर्मा का बचाव करने के लिए सजा सुनाई गई थी।

खंडपीठ ने मनु के वकील और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री राम जेठमलानी की 'टाल सिख जेंटलमैन' वाली कहानी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जेसिका का हत्यारा एक लंबा सिख व्यक्ति था, जिसने जेसिका पर गोलियां दागीं और वह वहां से फरार हो गया।

खंडपीठ ने जेठमलानी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मीडिया के दबाव में आकर फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि मनु इस हत्याकांड का दोषी है।

खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन के सबूत में यदि थोड़ी बहुत कमी भी हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा मामला ही दोषपूर्ण रहा है।

खंडपीठ ने जेठमलानी की उस दलील को भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अभियोजन ने उन्हें खास बैलिस्टिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया, जोकि उनके लिए लाभकारी हो सकता था।

विवादास्पद फोरेंसिक विशेषज्ञ रूप सिंह की बैलिस्टिक रिपोर्ट ने 'टू गन थिअरी' स्थापित की थी। इसके अनुसार घटना स्थल पर दो गोलियां दागी गई थीं। दोनों गोलियां अलग-अलग बंदूकों से निकली थीं।

बैलिस्टिक रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस गोली से जेसिका की मौत हुई, वह गोली उस बंदूक से नहीं दागी गई थी, जिसे घटना स्थल से बरामद किया गया था।

मनु ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी थी। उसे दिसंबर, 2006 में उच्च न्यायालय ने इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले पर जेसिका की बहन सबरीना ने खुशी जताई है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। आज इससे बेहतर खबर मेरे और मेरे परिवार के लिए कुछ भी नहीं हो सकती। इससे हमें बहुत राहत और संतुष्टि मिली है।"

खंडपीठ द्वारा अधिकांश तर्को को खारिज किए जाने और शर्मा की सजा कायम रखने के फैसले के बाद जेठमलानी ने कहा कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।

जेठमलानी ने कहा, "मैं इससे खुश नहीं हूं। कभी हम जीतते हैं और कभी हमारी हार होती है और आज मेरी हार हुई है। मेरे लिए यह कोई मुद्दा नहीं है।"

उन्होंने इस मामले की मीडिया द्वारा की गई रिपोर्टिग को भी खारिज कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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