चीनी अर्थव्यवस्था में तेज़ी

इस साल के पहले तीन महीनों में चीन की अर्थव्यवस्था में 12 फ़ीसदी से थोड़ी कम की बढ़ोत्तरी हुई है. जबकि पिछले 12 महीनों में अर्थव्यवस्था में उम्मीद से कहीं ज़्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.
इसके अलावा ये उम्मीद थी कि मार्च में उपभोक्ता मुद्रा स्फीति 2.7 फ़ीसदी रहेगी, जबकि ये 2.4 फ़ीसदी ही रही.
सरकार ने ब्याज दर में कटौती की और अर्थव्यवस्था में अधिक पैसा लगाया ताकि वैश्विक मंदी ने निपटा जा सके. लेकिन अब लोगों को ये चिंता सता रही है कि चीन का सकल घरेलू उत्पाद बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है.
कुछ विशेषज्ञों ने बार बार चेतावनी दी है कि संपत्ति के दाम बेवजह बढ़े हुए हैं और ये बहुत दिनों तक नहीं चल सकता.
बीज़िंग पर दबाव पड़ता रहा है कि वो अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी मुद्रा युआन का दाम बढ़ने दे, लेकिन चीन ने ऐसा करने से इंकार किया है.
चीन की वाणिज्य मंत्री यी ज़ियाओ झुन ने बीबीसी को बताया कि इस मामले का राजनीतिकरण हो रहा है. उन्होंने कहा कि चीन अपनी व्यापार और विनिमय नीति में स्थिरता बरकरार रखेगा.
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आर्थिक मंदी के दौरान चीन के अधिकारियों का निवेश में वृद्धि करना जल्दबाज़ी में लिया गया कदम हो सकता है.
पीकिंग विश्वविद्यालय के माइकल पेटिस ने बीबीसी को बताया कि आंकड़े चाहे बेहद मज़बूत दिख रहे हों लेकिन ऐसा हो सकता है कि ये आंकड़े बढ़ते निवेश को दर्शा रहे हों जो आगे चलकर फ़िज़ूलखर्च साबित हो.
बीबीसी की आर्थिक संवाददाता लिंडा डफ़िन का कहना है कि सस्ते ऋणों की वजह से लोग बड़ी संख्या में घर खरीद रहे हैं जिससे घरों के दाम में ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है. वो कहती हैं कि भय है कि किन्ही कारणों की वजह से लोगों के किश्तें नहीं दे पाने से ये पूरा किला धराशाई हो जाए और प्रॉपर्टी के दामों में ज़बरदस्त गिरावट हो सकती है.












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