मप्र में गरीब, स्वास्थ्य और शिक्षा सब कुछ है बेहाल (लीड-1)
गैर सरकारी संगठन समर्थन के योगेश कुमार ने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या को लेकर जो रिपोर्ट आई है उन सभी के मुताबिक राष्ट्रीय औसत से गरीबी कहीं ज्यादा मध्य प्रदेश में है। इतना ही नहीं प्रति व्यक्ति औसत आय देश के मुकाबले लगभग 10 हजार रुपए कम है।
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का भी हाल ठीक नहीं है। यहां 17.44 प्रतिशत से अधिक ऐसे स्कूल हैं जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। प्रदेश में 41 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं, जहां छात्राओं के लिए अलग से शौचालय है। वहीं 10 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली व्यवस्था है।
स्वास्थ्य सेवाओं के ब्यौरे के मुताबिक नवजात मृत्युदर, शिशु मृत्युदर, जनजातीय शिशु मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इतना ही नहीं कुपोषण के हाल भी राज्य में ठीक नहीं है। एनीमिया पीड़ित बच्चों का प्रतिशत चौंकाने वाला है। मातृ मृत्युदर, रक्त की कमी से पीड़ित महिलाओं की संख्या भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए यूनिसेफ की राज्य प्रमुख डा. तान्या गोल्डनर ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में नामांकन बढ़ा है, एड्स जैसे विषयों के प्रति जागरूकता आई है और मातृ मृत्युदर व शिशु मृत्युदर में कमी आई है मगर यह संयुक्त राष्ट्र विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
गोल्डनर का अभिमत है कि बच्चों को उनके अधिकार मिलना चाहिए क्योंकि उनमें बदलाव आने से समाज में बदलाव आता हैं। कुपोषण के मामले में प्रदेश की स्थिति अच्छी नही है। वहीं स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय सबसे बड़ी समस्या है। इस दिशा में पहल जरूरी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे उसे पूरा करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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