दिग्विजय सिंह ने की चिदम्बरम की आलोचना
एक अखबार में बुधवार को प्रकाशित दिग्विजय सिंह के एक लेख में कहा गया है, "चिदम्बरम किसी मुद्दे पर यदि एक बार अपना मन बना लेते हैं तो फिर उस पर अड़ जाते हैं।" उन्होंने हालांकि चिदम्बरम को अत्यंत बुद्धिमान, समर्पित और गंभीर बताकर उनकी सराहना भी की।
उन्होंने कहा, "मैं खुद कई दफा उनके बौद्धिक अहंकार का शिकार हुआ हूं। इसके बावजूद हम अच्छे मित्र हैं। मैं उनकी रणनीति से अलग मत रखता हूं क्योंकि उसमें नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बारे में नहीं सोचा गया है।"
उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक आधिकारिक परिपत्र के जरिए कहा गया था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं चाहते कि आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर उनके मंत्री बयान दें।
दिग्विजय ने कहा कि गृह मंत्री उन मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं जिससे जनजातीय लोग प्रभावित हो रहे हैं। वे इस मुद्दे को कानून व व्यवस्था से जोड़कर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जब मैंने इन मुद्दों को उनके (चिदम्बरम) समक्ष उठाया तो उन्होंने कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है। मेरा स्पष्ट मानना है कि कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी है और बतौर गृह मंत्री यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि इस मुद्दे को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए न कि संकीर्ण जातीय विचार से।"
उन्होंने कहा कि नक्सली समस्या का समाधान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों की आशाओं व आकांक्षाओं को पूरा किए बगैर संभव नहीं है। इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ इन लोगों को मिल रहा है कि नहीं, यह सुनिश्चित करना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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