बाघ प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार

इस कार्यशाला में देश के 17 बाघ पार्क वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों समेत देश भर के पार्को के निदेशक भी मौजूद थे। इस कार्यशाला में बाघ प्रोटोकॉल को देश के सभी पार्को में लागू करने का विचार किया गया।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण के सदस्य सचिव डा़ राजेश गोपाल के अनुसार इस मौके पर पार्क अधिकारियों को जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) का बाघ व वन्यजीवों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।

बाघों पार्को के कोर जोन व बफर जोन समेत पार्क की सीमा से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा कैसे की जाय इस बावत भी विचार विमर्श हुआ है। दक्षिण भारतीय राज्यों एवं मध्य भारत के बाघ पार्को के वन अधिकारियों समेत नक्सलवाद झेल रहे राज्यों के वनाधिकारियों से भी बाघ संरक्षण प्राद्यिकरण ने विचार विमर्श कर बाघों के संरक्षण के तरीके बताए।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक वाई़ डी़ झाला के अनुसार देश में बाघों की गणना इस बार नई तकनीक से किया जा रहा है। इसमें जहां आधुनिक कैमरा तकनीक अपनाई गई हैं वहीं विभिन्न पार्को के तमाम आंकड़ों का सत्यापन भी किया जा रहा है। बाघों के गले में कॉलर लगाने की तकनीक को पार्को में अपनाने की तैयारी की जा रही हैं। झाला के अनुसार अब तक पेंच, कान्हा, सुन्दरवन पन्ना, रणथम्बौर, टाइगर रिजर्व में ढाई से साढ़े तीन वर्ष तक के 10 प्रतिशत बाघों के गले में रेडियो कालर लगाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई हैं

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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