भारत, अमेरिका के बीच वित्तीय, आर्थिक साझेदारी (लीड-1)
साझेदारी समझौते पर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और भारत दौरे पर आए अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेथनर ने हस्ताक्षर किए। दोनों ने वैश्विक वित्तीय सुधारों पर भी चर्चा की, जिससे वर्ष 2008 में आए वित्तीय संकट जैसी स्थिति दोबारा पैदा होने से रोकी जा सके।
दो दिवसीय भारत दौरे पर आए गेथनर ने मुखर्जी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यह साझेदारी एक रूपरेखा बनाती है जो हमारी आर्थिक साझेदारी के बढ़ते प्रभाव के साथ है।"
गेथनर ने कहा कि साझेदारी से दोनों देशों में अधिक व्यापार, निवेश और रोजगार निर्माण में सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा, "दोनों देशों के वित्तीय क्षेत्रों में सुधार और पूंजी बाजार के विस्तार की रणनीति पर चर्चा को बढ़ावा देने के लिए हमारी विस्तारित साझेदारी मददगार होगी।"
मुखर्जी ने कहा कि द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर बहुत परिणामदायक वार्ता हुई। इसमें मौद्रिक और राजकोषीय नीति भी शामिल थी। ये सभी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेंगे।
मुखर्जी ने कहा, "भारत और अमेरिका लोकतंत्र , बाजार अर्थव्यवस्था और बहुलवाद के समान मूल्यों से बंधे हुए हैं। मुझे विश्वास है कि इस साझेदारी से दोनों देशों के लोगों की ऊर्जा और उद्यम को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।"
दोनों देशों ने चीनी की मुद्रा युआन की कम आंकी गई कीमत पर भी चर्चा की।
मुखर्जी ने कहा कि बंदरगाहों, सड़कों और अन्य क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए भारत को कम से कम 600 अरब डॉलर की आवश्यकता है।
गेथनर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारतीय आधारभूत ढांचा क्षेत्र में संभावनाएं देख रही हैं।
उद्योग जगत के शीर्ष लोगों से मुलाकात करने के लिए गेथनर बुधवार को मुंबई जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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