धर्मस्थलों के अवैध निर्माण पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त
न्यायाधीश दलवीर भंडारी और न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर ने राज्य सरकार से मामले पर उठाए गए कदमों की जानकारी देने वाला एक शपथ-पत्र तीन हफ्तों के भीतर पेश करने को कहा।
खंडपीठ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार फिर शपथ-पत्र पेश करने में विफल रही तो राज्य के मुख्य सचिव को सम्मन भेजा जाएगा और इस कार्य को पूरा करने के लिए लगाया जाएगा।
बहरहाल सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार सभी राज्य सरकारों ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर कहा है कि उन्होंने न्यायालय के पत्र और भावना के अनुसार कदम उठाया है।
सरकारों ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार अवैध कब्जे वाले स्थानों पर किसी भी नए धर्मस्थल के निर्माण को रोकना सुनिश्चित करने के लिए वे कड़ी निगरानी रख रही हैं।
सरकारों ने कहा कि नए अवैध धर्मस्थलों के निर्माण को रोकने के लिए न्यायालय के आदेश के अनुसार जिलाधिकारी को जिम्मेदार बनाया गया है।
न्यायालय ने पिछले वर्ष 29 सितम्बर को एक आदेश से सार्वजनिक भूमि पर अवैध धर्मस्थलों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
गुजरात उच्च न्यायालय के वर्ष 2006 में एक नगर निकाय को ऐसे अवैध ढांचों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर यह आदेश दिया था।
अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने नए अवैध निर्माणों को रोकने की जिम्मेदारी राज्यों के प्रमुख सचिवों को दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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