कुडानकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना में देरी

चेन्नई, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। यंत्रों की आपूर्ति में देरी के चलते तमिलनाडु के कुडानकुलम में प्रस्तावित 2,000 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु रिएक्टर की पहली इकाई शुरू होने में कुछ महीने का विलंब होगा।

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) जैसी सेवा प्रदाता कंपनियां अभी तक यह बताने में सक्षम नहीं हैं कि यंत्र कब तक उपलब्ध हो पाएंगे।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के कुडानकुलम में भारतीय ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) 1000 मेगावाट क्षमता वाले दो परमाणु रिएक्टर बना रहा है। इस संयंत्र के लिए रूस सभी उपकरणों की आपूर्ति कर रहा है।

भेल के कार्यकारी निदेशक पी. आर. श्रीराम ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "समझौते के तहत करीब 30 फीसदी यंत्रों की आपूर्ति रूस से होनी है। हमें इस बात की सूचना नहीं है कि ये यंत्र कब तक उपलब्ध हो जाएंगे।"

इस इकाई को शुरू करने का लक्ष्य बारबार टलता रहा है। सबसे सर्वप्रथम पहली इकाई शुरू करने का लक्ष्य दिसंबर 2007 तय किया गया था। इसके बाद इसे बढ़ाकर मध्य 2010 कर दिया गया और अब एक बार फिर इसे बढ़ाकर सितंबर 2010 कर दिया गया है।

एनपीसीआईएल के अनुसार, पहले परमाणु रिएक्टर के लिए लगभग 95 फीसदी बुनियादी काम हो चुका है जबकि दूसरे परमाणु रिएक्टर के लिए भी लगभग 87.3 फीसदी बुनियादी काम पूरा कर लिया गया है।

पिछले महीने रूस की एटमस्टोरी एक्सपोर्ट और एनपीसीआईएल ने कुडानकुलम में 1000 मेगावाट की क्षमता वाले दो और परमाणु रिएक्टर निर्मित करने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए।

भारत में रूस के सहयोग से 12 परमाणु रिएक्टर निर्मित किए जाने की संभावना है जिनमें छह 2012 से 2017 के बीच निर्मित होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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