पाकिस्तान के महाधिवक्ता ने इस्तीफ़ा दिया

शु्क्रवार को जिस वक़्त पाकिस्तान की संसद में राष्ट्रपति के अधिकारों से संबंधित एक अहम मसौदे पर चर्चा हो रही थी, उसी शाम देश के एटर्नी जनरल यानी महाधिवक्ता अनवर मंसूर अपना इस्तीफ़ा सौंप रहे थे.
अनवर मंसूर का कहना है कि वो देश में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपने संघर्ष में सरकार के असहयोग के चलते इस पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वो राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलना चाहते थे लेकिन उन्हें सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली.
हाल ही में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सैकड़ों नेताओं और अधिकारियों को उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों से माफी दिए जाने को ग़लत करार दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन मामलों के सुनवाई दो वर्ष पहले दिए गए इस क्षमादान के बाद बंद हो गई थी, उन्हें फिर से शुरू किया जाए.
मंत्रालय से मदद नहीं
इस मामले में अनवर मंसूर पिछले कुछ समय से सरकार के सामने लगातार अपनी बात रखते रहे हैं. उन्होंने विधि मंत्रालय के साथ इन मामलों को फिर से शुरू करने की कोशिशें कीं.
लेकिन उनका आरोप है कि विधि मंत्रालय ने इस दिशा में उनकी मदद नहीं की है.
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में मुक़दमा फिर से शुरू करने के लिए उन्होंने विधि मंत्रालय से जानकारी और दस्तावेज़ मांगे तो मंत्रालय ने उन्हें ये चीजें उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया.
राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी पर आरोप है कि अपनी पत्नी बेनज़ीर भुट्टो के प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने करोड़ों रूपए का गबन किया था. इस मामले की सुनवाई उन्हें माफी मिलने के बाद बंद हो गई थी.
पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच का काम चालू रहना चाहिए.












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