मुंबई हमले में सुनवाई पूरी, फैसला 3 मई को (लीड-2)
विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम ने कहा कि मामले में अंतिम जिरह बुधवार को पूरी हो गई और विशेष न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानी ने फैसले के लिए तीन मई की तिथि निर्धारित कर दी है। इस मामले में कसाब और उसके भारतीय सहयोगी फहीम अंसारी और सबाहुद्दीन अहमद मुख्य अभियुक्त हैं।
निकम ने संवाददाताओं से कहा, "यदि कसाब दोषी पाया गया तो विशेष न्यायाधीश उसकी सजा के बारे में निर्णय लेंगे।"
निकम ने कहा कि दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी कुख्यात आतंकवादी के खिलाफ सात महीने में सुनवाई पूरी हुई है। उन्होंने संसदीय चुनाव, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और अदालती छुट्टियों को इससे अलग कर दिया।
निकम ने कहा कि कसाब ने हालांकि मामले की सुनवाई को लंबा खीचने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद सुनवाई रिकार्ड समय में पूरी हुई है।
मामले की सुनवाई की शुरुआत में कसाब ने सबसे पहले खुद को नाबालिग बताया था। उसके इस दावे को अभियोजन ने सिरे से खारिज कर दिया था।
निकम ने कहा कि इसके बाद उसने जेल में जहर देने का आरोप लगाया और अदालत में पाउडर भी पेश किया, लेकिन परीक्षण में यह सामान्य चावल का चूरा साबित हुआ।
निकम ने मामले में देरी करने के लिए कुछ अन्य बातों के साथ ही कसाब के बार-बार बयान बदलने की चाल का भी उल्लेख किया।
निकम ने कहा कि इससे यह साबित होता है कि वह अल कायदा के उसूलों पर चलकर सुनवाई को बाधित करना और इसमें देरी करना चाहता था।
निकम ने हालांकि खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब सुनवाई पूरी हो गई है और फैसले की तिथि निर्धारित हो चुकी है।
निकम ने कहा कि 650 गवाहों और ढेर सारे साक्ष्यों की वजह से अभियोजन यह साबित करने में सफल रहा है कि न केवल लश्कर-ए-तैयबा, बल्कि कुछ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी भी 26/11 के आतंकी हमले से संबद्ध थे।
निकम ने कहा कि यह केवल कसाब के कहने से साबित नहीं हुआ है, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर इसे साबित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस हमले में वरिष्ठ पद वाले कुछ पाकिस्तानी नागरिकों के साथ ही वर्तमान में अमेरिकी जेल में कैद लश्कर से संबद्ध डेविड हेडली की संलिप्तता भी साबित हुई है।
निकम ने कहा, "इन साक्ष्यों के आधार पर हम यह साबित करने में सफल रहे हैं कि यह राज्य प्रायोजित आतंकवाद था।"
अदालत द्वारा नियुक्त कसाब के वकील के.पी.पवार ने मीडिया कर्मियों से कहा कि उन्होंने प्रमुख आरोपी के खिलाफ अभियोजन के झूठे और फर्जी दावों को बेनकाब करने की कोशिश की है।
पवार ने कहा, "मैंने घटनाओं की संभाव्यता और असंभाव्यता पर बहस करने की कोशिश की है। यह कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्क के अनुसार क्या कसाब घटना के समय मौजूद था या नहीं।"
पवार ने कहा कि उन्होंने कई सारे सबूतों की सत्यता पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें विशेष अदालत में प्रस्तुत किए गए क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे का फुटेज शामिल है।
पवार ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आरोपी के खिलाफ अंतिम फैसला देने से पहले विशेष अदालत इन सभी बातों पर विचार करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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