स्टीफन कोर्ट में मरने वालों की संख्या 42 हुई, जांच समिति का गठन (लीड-1)
पश्चिम बंगाल सरकार ने त्रासदी के कारणों की जांच करने के लिए 11 सदस्यीय एक समिति का गठन किया है।
पुलिस के मुताबिक दो शवों की पहचान उनके साथ मिले पहचान पत्रों की मदद से की गई। इनमें एक की पहचान 22 वर्षीय बिद्युत आचार्य के रूप में की गई, जो कॉल सेंटर कंपनी 'विलटेक कंप्यूटर्स' में काम करता था और दूसरे शव की पहचान संगीता कुमारी के रूप में की गई। अभी तक सात लोग लापता बताए जा रहे हैं।
पांचवीं मंजिल से सभी शव झुलसी हुई हालत में बरामद हुए हैं। अग्निशमन कर्मी और नागरिक कार्यकर्ता बदबू और गंदगी के बीच मलबा हटाने में जुटे हुए हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त जावेद शमीम ने आईएएनएस को बताया, "देर रात दो शव बरामद किए गए, बाकी शव सोमवार सुबह पाए गए। दोपहर बाद पांच लाशें खोजी गईं।"
शमीम ने बताया कि शवों को एसएसकेएम अस्पताल के सुपुर्द कर दिया गया है ताकि पीड़ितों के परिजन उनकी शिनाख्त कर सके हैं, जो पिछले छह दिनों से लगातार अपने सगे संबंधियों के इंतजार में वहीं डेरा डाले हैं।
सरकार द्वारा गठित जांच समिति में पूर्व गृह सचिव सुरीन रॉय और राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक दिनेश बाजपेयी शामिल किए जाएंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रणब मुखर्जी और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए एक जांच समिति के गठन की मांग की थी।
मुखर्जी कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, "जांच जरूरी है। इस बात की पड़ताल होनी चाहिए कि आखिर यह हादसा क्यों हुआ, सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे या नहीं।"
रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने इस हादसे की कार्यरत न्यायाधीश से समयबद्ध न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते, तो सीबीआई जांच होनी चाहिए और यह जांच निष्पक्ष होनी चाहिए"
इस हादसे में मारे गए लोगों में से अब तक सिर्फ 20 शवों की ही पूरी तरह से शिनाख्त हो सकी है। बहुत से शव ऐसे हैं जिनके कई दावेदार हैं। विवादित शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए परीक्षण कराए जा रहे हैं।
गौरतलब है 1910 में निर्मित स्टीफन कोर्ट इमारत में गत 23 मार्च को यह भीषण अग्निकांड हुआ था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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