गूगल-चीन विवाद अमेरिकी राजनीति का पार्ट

गूगल का कदम राजनीतिक
चीन के प्रमुख शोधकर्ता डिंग यिफान ने अपने लेख में लिखा है कि गूगल का हटना पूरी तरह व्यावसायिक कदम नहीं है। यह घटना अमेरिका के राजनीतिक खेल का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस, भारत और अन्य देशों में भी गूगल की सेवा जांच के दायरे में है।
उल्लेखनीय है कि गूगल ने चीन में जारी मीडिया सेंसरशिप के कारण चीन छोड़ने की धमकी दी है। इसके अलावा दो अन्य प्रमुख इंटरनेट कंपनियों ने चीन से अपना व्यवसाय समेटने की धमकी दी है। गूगल अपने चीनी भाषा के सर्च इंजन वेबसाइट का मुख्यालय हांगकांग ले गया है और सोमवार को गूगल ने चीनी भाषा के खोज परिणामों को रोक दिया।
ईरान, जार्जिया में अपनायी सेम पॉलिसी
लेख में कहा गया है कि गूगल की इस घोषणा के कुछ ही दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने ओबामा प्रशासन की विदेश नीति में सहायता के लिए गूगल की जमकर प्रशंसा की थी। क्लिंटन ने कहा कि जार्जिया और ईरान में जनता की राजनीतिक विचारधारा को गूगल ने प्रभावित किया था। इन देशों की जनता को अमेरिकी राजनीतिक कदमों और मूल्यों की ओर मोड़ने में गूगल की सकारात्मक भूमिका की तारीफ करते हुए व्हाइट हाउस का कहना था कि गूगल अकेले चीन में एक बड़ी भूमिका नहीं निभा सकता जैसा कि उसने जार्जिया और ईरान में किया।
इसके कुछ दिनों बाद ही गूगल ने दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजार से अपनी सेवाएं बंद कर दी और कहा कि चीनी सरकार के कड़े इंटरनेट सेंसरशिप प्रावधनों को वह सहन नहीं कर सकती। लेख में आरोप लगाया गया कि गूगल के ओबामा प्रशासन के साथ नजदीकी संबंध हैं और ओबामा के राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार में कंपनी चौथा सबसे बड़ा प्रायोजक थी। इस नजदीकी संबंध के कारण गूगल ओबामा प्रशासन की विदेश नीति को लागू करने में मददगार है।












Click it and Unblock the Notifications