सहज प्रतिबद्धता वाले व्यक्ति थे गिरिजा प्रसाद कोईराला
बिहार के ताड़ी में पैदा हुए गिरिजा प्रसाद कोईराला, कृष्ण प्रसाद कोईराला के बेटे थे। कृष्ण प्रसाद कोईराला महात्मा गांधी के अनुयायी थे और अपनी लोकतंत्र समर्थक प्रतिबद्धताओं के कारण नेपाल में जेल में ही उन्होंने प्राण त्याग दिए थे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से शिक्षित कोईराला ने दक्षिण पूर्व नेपाल में अपने गृहनगर बिराटनगर से मजदूर आंदोलन के जरिए राजनीति की शुरुआत की। नेपाल का यह क्षेत्र सबसे बड़ी जूट मिल के लिए जाना जाता है।
कोईराला ने नेपाल मजदूर युनियन की स्थापना की, जो आज भी नेपाल ट्रेड युनियन कांग्रेस के रूप में अस्तित्व में है।
कोईराला और उनके तीन बड़े भाई बी.पी.कोईराला, तारिनी कोईराला और मात्रिका कोईराला वर्ष 1960 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के अगुआ थे। उस समय नेपाल नरेश महेंद्र ने नेपाल के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बी.पी.कोईराला को पद से बर्खास्त कर दिया और कोईराला भाईयों को जेल भेज दिया।
वर्ष 1967 में जेल से रिहा होने के बाद कोईराला भारत में निर्वासित कर दिए गए। वहां उन्होंने नेपाल के शाही शासन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। नेपाल नरेश पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनवाने के बाद कोईराला वर्ष 1979 में नेपाल वापस लौटे।
कोईराला के नेतृत्व में नेपाली कांग्रेस ने वर्ष 1991 का चुनाव जीता और वह पहली बार प्रधानमंत्री बने।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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