सरकार ने 'हिटलिस्ट' का आरोप ठुकराया

श्रीलंकाई राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस बात से इनकार किया है कि उसके पास ऐसे कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की कोई ‘हिटलिस्ट’ है जो सरकार के निशाने पर हैं.
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वे कुछ गुटों पर निगरानी रखने के लिए क़ानून बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
ये लिस्ट कुछ दिन पहले एक स्थानीय वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी और इसे लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्मूमन राइट्स वॉच और अन्य गुटों ने आवाज़ उठाई है.
इस सूची में ऐसे 35 पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और वकीलों का नाम है जो सरकार के आलोचक हैं.
राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यालय की वेबसाइट ने बयान जारी कर कहा है, “राष्ट्रपति कार्यालय को ऐसी किसी सूची के बारे में सबूत नहीं मिले हैं जो ख़ुफ़िया विभाग ने बनाई हो- जैसा कि लंका न्यूज़ वेब में दावा किया गया है.”
'हिटलिस्ट'
बयान में कहा गया है, “ऐसी सोच की कोई वजह नहीं है कि सरकार की आलोचना करने वालों को कोई ख़तरा है या वे सुरक्षित नहीं है- इसमें पत्रकार, कार्यकर्ता या मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल है.”
वेबसाइट पर जारी सूची में श्रीलंका के प्रमुख मानवाधिकार वकील जेसी वेलियामुना जैसे लोगों का नाम है.
इन लोगों ने चिंता जताते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्मूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने श्रीलंकाई अधिकारियों से कहा है कि वे ‘विच हंट’ को बंद करें.
कुछ हफ़्ते पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री रत्नासिरी विक्रमानायके और अन्य मंत्रियों ने आगाह किया था कि जो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संगठन सरकार के ख़िलाफ़ षडयंत्र रचते हुए पाए जाएँगे उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.
अमरीका की एक ताज़ा रिपोर्ट में श्रीलंका में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को मिल रही धमकियों को लेकर चिंता जताई गई है.












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