पापड़वाला, जो 28 सालों से लड़ रहा है हक की लड़ाई..
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। कठिन हालातों में भी हार न मानने वाले पश्चिम बंगाल के एक पापड़ विक्रेता मोहम्मद समद खान पिछले 28 वर्षो से नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) के साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, बावजूद इसके अभी भी उन्होंने न्याय मिलने की आशा नहीं छोड़ी है।
कंपनी के साथ लड़ाई का यह सिलसिला उस समय शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जिले में वर्ष 1982 में एनटीपीसी ने खान और अन्य लोगों की भूमि को फरक्का थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण कर लिया था।
एनटीपीसी ने भूमि का अधिग्रहण करने के बाद उस समय लोगों से यह वादा किया गया था कि पुनर्वास योजना के तहत उनके परिवार के एक सदस्य को कंपनी में शैक्षिक योग्यता और तकनीकी अनुभव के आधार पर नौकरी दी जाएगी।
मोहम्मद समद खान उन 1,000 लोगों में शामिल थे जिन्होंने अपनी जमीन कंपनी को इस उम्मीद के साथ दी थी कि उन्हें नौकरी मिलेगी। खान को वर्ष 1984 में एनटीपीसी से एक पत्र मिला, जिसमें कहा गया था कि उनको जल्दी ही नौकरी दे दी जाएगी लेकिन बार-बार कंपनी को उसके वायदे की याद दिलाने के बावजूद आज तक इस सिलसिले में कुछ नहीं हुआ।
एनटीपीसी ने वर्ष 1988 में समद खान को स्टोर कीपर की नौकरी के लिए बुलाया गया लेकिन उनकी उम्मीदवारी को निरस्त कर दिया गया।
इन हालातों हालातों में भी खान ने हार नहीं मानी और वर्ष 1991 में एक बार फिर उन्होंने कंपनी का दरवाजा खटखटाया। तब उन्होंने यह निश्चित कर लिया था कि वह न्याय पाने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) का सहारा लेंगे।
एनटीपीसी से जब उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में अपील की। इसके तहत आयोग ने खान को सूचना न उपलब्ध कराने की एवज में कार्पोरेशन को 11 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
खान ने एक साक्षात्कार के दौरान आईएएनएस को बताया, "मैं अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहुंगा। न्याय मिलने तक मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications