मंडेला की सहयोगी फ़ातिमा का निधन

नेल्सन मंडेला की निकट सहयोगी और रंगभेद विरोधी आंदोलन की प्रमुख नेता फ़ातिमा मीर का निधन हो गया है.
अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस की नेता प्रोफ़ेसर फ़ातिमा मीर कुछ समय से बीमार चल रही थीं. उन्होंने शुक्रवार शाम डरबन के एक अस्पताल में अंतिम साँस ली.
वह 81 साल की थीं.
दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेदी शासन के ख़िलाफ़ लडा़ई के साथ-साथ वहाँ अश्वेतों और भारतीय मूल के लोगों के बीच सौहार्द का माहौल बनाने में भी प्रोफ़ेसर फ़ातिमा मीर का भारी योगदान रहा है.
भारतीय मूल की समाजसेवी फ़ातिमा ने कई किताबें लिखी थीं जिनमें से सबसे चर्चित है- नेल्सन मंडेला की जीवनी 'हाइअर दैन होप'.
उन्होंने श्याम बेनेगल की फ़िल्म 'द मेकिंग ऑफ़ महात्मा' की पटकथा भी लिखी थी.
भारत सरकार ने उन्हें 2003 में प्रवासी भारतीय सम्मान दिया था.
अथक योद्धा
नेल्सन मंडेला फ़ाउंडेशन के प्रमुख अचमत डंगोर में फ़ातिमा मीर को मंडेला परिवार का निकट मित्र और रंगभेद के ख़िलाफ़ लड़ाई का एक बड़ा योद्धा बताया. डंगोर ने कहा, "फ़ातिमा मीर 60 वर्षों से भी ज़्यादा समय से मंडेला और उनके परिवार की निकट मित्र थीं. वह एक शिक्षाविद और रंगभेद के ख़िलाफ़ लड़ाई की एक बड़ी नेता थीं."
मंडेला की पत्नी ग्रेसा मशेल ने अपने बयान में मीर के निधन को राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान फ़ातिमा मीर ने सरकार की बर्बरता के ख़िलाफ़ कई बड़े धरना-प्रदर्शनों का आयोजन किया था.
रंगभेदी सरकार ने फ़ातिमा को कई बार सलाखों के पीछे डाला था, और 1976 में वो और मंडेला की पूर्व पत्नी विनी मैदिकिज़ेला मंडेला को एक साथ जेल में थीं.
फ़ातिमा मीर उन गिनेचुने रंगभेद विरोधी नेताओं में से थीं जिन्होंने 1994 में दक्षिण अफ़्रीका में पहले लोकतांत्रिक चुनाव के बाद सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़ने की लालसा नहीं दिखाई. इसके बदले फ़ातिमा ने लेखन, शिक्षा और समाज सेवा से जुड़े रहने को प्राथमिकता दी.












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