हंगामे के बीच महिला आरक्षण विधेयक पेश

कुछ सांसद तो राज्यसभा के सभापति उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के आसन तक पहुँच गए और उनके हाथ से फ़ाइल छीनने की कोशिश की. कुछ सांसदों ने विधेयक की प्रतियाँ फाड़ डालीं. बाद में राज्यसभा को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. उम्मीद है कि शाम छह बजे राज्यसभा में इस पर मतदान होगा.
दूसरी ओर लोकसभा में भी इस विधेयक को लेकर सांसदों ने ख़ूब हंगामा किया. यहाँ भी राजद, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सांसदों ने अध्यक्ष के आसन तक पहुँच कर शोर-शराबा किया. हंगामे को देखते हुए लोकसभा की भी कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.
महिला आरक्षण विधेयक से नाराज़ राजद और समाजवादी पार्टी ने केंद्र में सत्तारुढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया है. राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने पत्रकारों को यह जानकारी दी. दोनों ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि दोनों पार्टियाँ दलित विरोधी, मुस्लिम विरोधी और पिछड़ा विरोधी हैं.
भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन कर रही है. महिला आरक्षण विधेयक में संसद और राज्य विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है. राज्यसभा में पास होने के बाद इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया जाएगा. संसद के दोनों सदनों में इस विधेयक को दो तिहाई बहुमत से पास होना ज़रूरी है.
इसके बाद ये विधेयक राज्य विधानसभाओं में रखा जाएगा, जहाँ इसे 50 प्रतिशत मतों से पास होना ज़रूरी है. इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से यह विधेयक क़ानून का रूप ले पाएगा. पहली बार महिला आरक्षण विधेयक क़रीब 14 साल पहले वर्ष 1996 में संसद में पेश किया गया था. लेकिन राजनीतिक दलों में सहमति न बन पाने के कारण कभी भी यह विधेयक पारित नहीं हो पाया.












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