राष्ट्रपति ने किया नैनो उपग्रह का अनावरण

नैनो उपग्रह जुगनू को आईआईटी के 50 छात्रों की टीम ने मिलकर बनाया है। इस उपग्रह से बाढ़, सूखा और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित सूचनाओं के संग्रह मे मदद मिलेगी।

इस उपग्रह का अनावरण करने के बाद राष्ट्रपति से आईआईटी के छात्रों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस खोज से आईआईटी कानपुर के छात्रों ने सिर्फ भारत ही में नहीं बल्कि दुनियाभर में ख्याति प्राप्त की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने अपने अस्तित्व के 50 सालों में एक लंबा सफर तय किया है। संस्थान ने प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में देश में एक मिसाल पेश की है।

इस दौरान पाटील ने छात्रों और संकाय सदस्यों से आह्वान किया कि वे ऐसे उपकरण का विकसित करें जिनमें कम ऊर्जा का दोहन हो और उनसे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

आईआईटी कानपुर के अधिकारियों के मुताबिक नैनो उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान(इसरो) के सौंप दिया गया। इसरो कुछ परीक्षण करने के बाद सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इस उपग्रह का शुभारंभ करेगा। इससे पहले राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने बटन दबाकर संस्थान के 'टाइम कैप्सूल' को जमीन में दफन किया।

आईआईटी कानपुर ने कैप्सूल की शक्ल में विशेष धातु से एक ऐसी मशीन (टाइम कप्सूल) तैयार की है, जिसमें चिप, पेनड्राइव और संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों और गौरवशाली अतीत से संबंधित दस्तावेज रखे गए हैं।

इसमें आईआईटी कानपुर का पचास साल का गौरवशाली इतिहास सुरक्षित रहेगा। आज से पचास साल बाद किसी को आईआईटी के इतिहास के बारे में जानना हो तो वह इस टाइम कैप्सूल को जमीन से निकालकर सारी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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