हरियाणा के एक गांव में तैयार होते थे नकली नोट

पुलिस ने हरियाणा के मेवात बाहुल्य नूंह मेवात के घाघस गांव में इस गिरोह के सरगना हकमुद्दीन के घर से आधुनिक कम्प्यूटर, प्रिंटर व स्कैनर के साथ ही नोट छापने के लिए जरूरी सामग्री बरामद की है। राजस्थान के अलवर जिला पुलिस ने पिछले हफ्ते ही इस गिरोह के आठ लोगों को लम्बी तलाश के बाद दबोचने में कामयाबी हासिल की थी।

अलवर के जिला पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार ने बताया कि सबसे पहले 27 फरवरी को गिरोह के सरगना सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। उसके बाद गत बुधवार को ही गिरोह के तीन और सदस्यों तक पहुंचा गया।

मामले की जांच कर रहे सदर थाना अधिकारी राजेश जैन ने बताया कि गिरोह के लोग कम्प्यूटर की मदद से नकली नोट तैयार करते थे। नोट असली है या नकली, इस बात का पता लगाना आम आदमी के लिए बेदह मुश्किल है। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद नकली नोट गिरोह के शातिर ऐसे नोट तैयार करते थे कि इन्हें देखकर कोई आसानी से गच्चा खा जाए। नकली नोट तैयार करने में शातिर बदमाश पूरी तरह फुलप्रूफ और आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करते थे

जैन के अनुसार अंतर्राज्यीय गिरोह का नकली नोट तैयार करने का नेटवर्क नगीना के गांव घाघस (नूंह-मेवात हिरयाणा) से चलाया जा रहा था। गिरोह के सरगना हकमुद्दीन के घर कम्प्यूटर, प्रिंटर व स्कैनर आदि के माध्यम से नकली नोट तैयार किए जाते थे। पुलिस ने उसके घर से इन उपकरणों के साथ नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली स्याही, पेपर, पेंसिल व रबड़ आदि भी बरामद किए हैं।

नकली नोट में महात्मा गांधी का वाटर मार्क तैयार करने के लिए शातिर बदमाशों ने चमड़े के टुकड़े पर महात्मा गांधी का चित्र बना स्टाम्प तैयार किया। इस स्टाम्प से ठप्पा लगाकर नकली नोट पर महात्मा गांधी का वाटर मार्क बनाते थे।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि नकली नोटों की पहचान करना मुश्किल है। नोट नकली हैं इसकी पहचान कैसे हो इसका तरीका भी गिरोह के लोगों ने ही पुलिस को बताया। उनके अनुसार नकली नोटों को जब हाथ पर हल्का पानी लगाकर गिना जाता है तो नोट की स्याही हाथ पर लग जाती है। हाथ हल्के काले होने के साथ-साथ जहां पानी लगता है वहां से नोट का रंग भी हल्का हो जाता है।

उधर, नकली नोट प्रकरण में बुधवार को गिरफ्तार किए गए तीन अभियुक्तों को पुलिस ने गुरुवार को न्यायालय में पेश किया। न्यायाधीश ने एक अभियुक्त को जेल तथा दो को पुलिस रिमाण्ड पर भेजने के आदेश दिए हैं।

बाजार में धड़ल्ले से चल रहे नकली नोटों ने आमजन की नींद उड़ा रखी है। अलवर के साथ भरतपुर व धौलपुर तक जिले से नकली नोट गिरोह ने जाल फैला लिया है। खास तौर पर ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर जाली मुद्रा बाजार में खपाई जा रही है। हालात यह हैं कि एक हजार व पांच सौ के नोट हाथ में आते ही लोग ठिठक जाते हैं।

एक हजार व पांच सौ रुपये के नकली नोटों के बाद बाजार में 50 व 100 रुपये के जाली नोट चलाए जा रहे हैं। छोटी मुद्रा के नकली नोट तैयार करने के पीछे कारण है कि इन नोटों को बाजार में आसानी से चलाया जा सकता है। ज्यादातर लोग इन नोटों की जांच-परख भी नहीं करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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