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बजट 2010: सब की नज़रें वित्त मंत्री पर

By Ajay Mohan Verma
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बजट 2010: सब की नज़रें वित्त मंत्री पर

आसमान छूती महंगाई, बढ़ते वित्तीय घाटे और विकास की दर बनाए रखने की चुनौतियों के बीच आज भारत के वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी वर्ष 2010-11 का बजट पेश कर रहे हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए प्रणव मुखर्जी ने यह संकेत दे दिए हैं कि महंगाई अभी और बढ़ सकती है लेकिन आम आदमी उनसे मंहगाई कम करने के उपायों की अपेक्षा कर रहा है.

संभावना जताई जा रही है कि बजट में प्रणव मुखर्जी आर्थिक मंदी से निपटने के लिए दिए गए राहत पैकेज को अब चरणबद्ध तरीक़े से वापस लेने की घोषणा कर सकते हैं और इस पर उद्दोग जगत की नज़र है.

कई जगह ये बहस चल रही है कि अभी भी अमरीका और यूरोप की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से संभली नहीं है तो क्या राहत पैकेज को समेटना जल्दबाज़ी तो नहीं होगी?

माना जा रहा है कि इसके अलावा प्रत्यक्ष कर ढाँचे में बदलाव, कच्चे तेल के दामों में उतार चढ़ाव से होने वाले असर को कम करने की कोशिश और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश की प्रक्रिया फिर से शुरु करने की घोषणा बजट के कुछ मुख्य बिंदु होंगे.

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के क़दमों को लेकर भी बजट पर नज़र रहेगी.

वैश्विक आर्थिक मंदी को देखते हुए सरकार ने कई क्षेत्रों में राहत पैकेज दिए थे और इससे उन क्षेत्रों को लाभ भी हुआ था.

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उत्पाद कर दस प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत कर देने से इस उद्योग को बहुत फ़ायदा हुआ है. लेकिन इस बार बजट में यह राहत आंशिक रुप से वापस लिए जाने की घोषणा हो सकती है और उद्दोग जगत इसे काफ़ी गौर से देख रहा है.

चूंकि अमरीका और यूरोप की स्थिति अभी भी संभली नहीं है और इसकी वजह से सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की हालत अभी भी बहुत अच्छी नहीं हुई है, हो सकता है कि इस उद्योग को दी गई राहत अभी कुछ समय तक जारी रखने की घोषणा हो.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक्सिस बैंक के अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य का कहना है, "अगले वित्तीय वर्ष के लिए विकास का जो लक्ष्य रखा गया है उसे हासिल करना कठिन नहीं है अगर कृषि उत्पाद और औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोत्तरी जारी रहे."

उनका कहना है, "लेकिन बढ़ते वित्तीय घाटे पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार राहत पैकेज वापस लेने की घोषणा कर सकती है."

एजेंसी के अनुसार क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने भी कहा है कि बजट में राहत पैकेज वापस लिए जाने की घोषणा किए जाने के आसार हैं.

यूपीए सरकार की दूसरी पारी शुरु होने के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों में विनिवेश शुरु करने की घोषणा की थी.

इसके तहत सरकार ने एनटीपीसी में अपनी हिस्सेदारी को कम किया था.

लेकिन अब माना जा रहा है कि इस बजट में वित्तमंत्री सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी कम करने की घोषणा कर सकते हैं.

यह क़दम भी वित्तीय घाटे को कम करने की कोशिश के रुप में उठाया जाएगा.

इसी तरह पेट्रोलियम कंपनियों पर सब्सिडी का भारी भरकम बोझ अभी भी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रणव मुखर्जी इस बोझ को कम करने की दिशा में कोई क़दम उठाने की घोषणा कर सकते हैं.

अनुमान है कि वित्तमंत्री अपने बजट में देश के ढाँचागत विकास यानी इंफ़्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए कई क़दम उठाने की घोषणा कर सकते हैं.

इसके तहत सरकार के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने की कोशिश हो सकती है.

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