आम बजट : प्रणब ने कहा टल चुका है बुरा वक्त (लीड-1)

मुखर्जी ने कहा, "आज जब मैं आपके सामने खड़ा हूं, मैं कुछ यकीन से कह सकता हूं कि हम संकट से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "यह नहीं कहा जा रहा है कि आज की चुनौतियां नौ महीने पहले की चुनौतियों से कम बड़ी हैं, जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में दोबारा कार्यभार संभाला था।"

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सूचीबद्ध की गई तीन चुनौतियां आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें जल्द से जल्द नौ फीसदी की उच्च विकास दर पर लौटना और उसे दहाई के आंकड़े तक ले जाना, विकास को ज्यादा समग्र बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2009 में फरवरी में उन्होंने अंतरिम बजट और जुलाई में पूर्ण बजट पेश किया था। उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, मंदी और दौर से गुजर रही थी और व्यापार जगत में उत्साह कम था।

लेकिन इस साल का बजट वर्ष 2009-10 के आर्थिक सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जो अगले वर्षो में 10 फीसदी विकास दर के आंकड़े को छू सकती है।

जिस समय मुखर्जी सदन में बजट पेश कर रहे थे उस समय वहां लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार के अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज मौजूद थीं।

मुखर्जी का यह चौथा तथा लगातार दूसरी बार सत्ता में आई संप्रग सरकार का दूसरा बजट है।

बजट को सदन में पेश करने से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उसे मंजूरी दिलाई गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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