'जरदारी के खिलाफ मामले को केवल सरकार जिंदा कर सकती है'

एनएबी के अध्यक्ष नावीद अहसान की ओर से आए पत्र के जवाब में कानून मंत्रालय ने कहा है कि स्विस सरकार एनएबी को नहीं जानती। अतीत में स्विस सरकार के साथ सभी पत्राचार सरकार द्वारा किए गए थे।

पत्र में कहा गया है कि महान्यायवादी ने खुद इस मामले को एक स्विस अदालत में उठाया था और उन्होंने उस मामले को तब वापस ले लिया था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भ्रष्टाचार के मामलों में माफी के प्रावधान की घोषणा की थी।

सूत्रों ने कहा है कि एनएबी प्रमुख कानून मंत्रालय की प्रतिक्रिया के आधार पर बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और आगे की कार्रवाई के लिए उससे दिशानिर्देश प्राप्त करेंगे।

ज्ञात हो कि मुशर्रफ ने नेशनल रिकांसिलिएशन आर्डिनेंस (एनआरओ) के रूप में माफी का प्रावधान लागू किया था। इस प्रावधान का पहला लाभ पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो (दिवंगत) और उनके पति जरदारी को मिला था। दोनों भ्रष्टाचार के कई सारे मामलों का सामना कर रहे थे। इस प्रावधान के बाद ही उनकी स्वदेश वापसी हुई थी। इसके अलावा कोई 250 अन्य राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों को भी एनआरओ से लाभ हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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