जैविक सब्जियां शेखावटी पर्यटन का नया आकर्षण
मधुश्री चटर्जी
नवलगढ़ (राजस्थान), 20 फरवरी (आईएएनएस)। राजस्थान के शेखावटी इलाके के किसानों में जैविक खेती के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा है। खेती की लागत घटाने और फसलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए करीब 15,000 किसानों ने जैविक खेती को अपनाया है।
झुंझनू, नवलगढ़, सीकर, चुरू जिलों और मांडव और नागौर के कुछ हिस्सों में फैले 1,3784 वर्ग किलोमीटर इलाके में सब्जियां और अनाज जैविक तरीके से उपजाए जा रहे हैं।
राजस्थान में जैविक कृषि के लिए अभियान चलाने वाले एम.आर. मोरारका-जीडीसी ग्रामीण शोध फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षो में पूरे राज्य में करीब 30,000 किसानों ने जैविक खेती को अपनाया है।
किसानों अपने जैविक उत्पादों को पूरे देश में बेचने के अलावा उनको पर्यटन का केंद्र बनी शेखावटी की हवेलियों में भी बेच रहे हैं।
जैविक खेती से किसानों को छोटे पैमाने पर ग्रामीण पर्यटन आवास गृहों की स्थापना के लिए भी प्रोत्साहन मिला। केवल नवलगढ़ के आसपास सात ग्रामीण पर्यटन रिसार्ट स्थापित हो चुके हैं। इन रिसार्टों में 6.5 से सात हेक्टेयर क्षेत्र में छोटी-छोटी झोपड़ियां बनाई जाती हैं।
नवलगढ़ से 10 किलोमीटर दूर आठ हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक ढंग से सरसों, ज्वार, बाजरा और सब्जियां उगाने वाले और एक टूर ऑपरेटर मनोज शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "झोपड़ियों के आधार पर हम पर्यटकों से हर रात का 475 रुपये से 500 रुपये किराया लेते हैं।"
शर्मा ने खेतों में सरसों की फसल के बीच दो झोपड़ियों का निर्माण किया है।
एम.आर. मोरारका-जीडीसी ग्रामीण शोध फाउंडेशन के अध्यक्ष कमल मोरारका ने आईएएनएस को बताया, "कि दो वर्ष पहले तक हमने जैविक खेती के वाणिज्यिक फायदों का लाभ नहीं उठाया था। हमने महसूस किया कि इसमें परंपरागत खेती से लागत कम है और उत्पाद भी बेहतर हैं। इसके बाद हमने किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया और अपने उत्पाद एक अलग कंपनी-मोरारका रिटेल आउटलेट के माध्यम से बेचे जाते हैं।"
अग्रणी व्यापारी मोरारका का परिवार शेखावटी से है। उन्होंने 1990 के दशक में अपना राजनीतिक करियर समाप्त होने के बाद इलाके के विकास के लिए प्रयास करना शुरू किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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