नेपाली माओवादियों ने कहा, कोबद से अब कोई संपर्क नहीं
काठमांडू, 20 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल के माओवादियों ने भारतीय पुलिस के उस आरोप पत्र पर आपत्ति जताई है जिसमें उनके प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड के साथ भारत में गिरफ्तार नक्सली नेता कोबद गांधी की मुलाकात का जिक्र है। कहा गया है कि मौजूदा स्थितियों में इन आरोपों का कोई वजूद नहीं है।
नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के उपाध्यक्ष और सांसद नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि प्रचंड और कोबद की कथित मुलाकात को सामने लाने का मतलब अनावश्यक विवाद को तूल देना है।
श्रेष्ठ ने आईएएनएस से कहा, "राजशाही के खिलाफ 10 सालों के संघर्ष के दौरान प्रचंड ने दुनियाभर की विभिन्न कम्युनिस्ट पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।" समान हित और समान विचारधारा होने कारण ये बैठकें हुईं थी।
उन्होंने कहा कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उनकी पार्टी 2006 से मुख्यधारा की राजनीति में शामिल है। साथ ही हमारा किसी भूमिगत संगठन से कोई संपर्क नहीं है। प्रचंड के साथ कोबद की कथित बैठक को सामने लाने की अब कोई प्रासंगिकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि नेपाली माओवादियों का भारतीय नक्सलियों के साथ अब कोई संबंध नहीं है और न ही उनकी पार्टी भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी सशस्त्र आंदोलन को समर्थन कर रही है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में शुक्रवार को पुलिस ने पिछले साल गिरफ्तार हुए नक्सली नेता कोबद गांधी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था जिसमें कहा गया कि उसे अपने संगठन के गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी थी। इनमें झारखण्ड में अपहरण और हत्या के मामले भी शामिल हैं।
यह भी कहा गया कि कोबद ने प्रचंड के साथ नेपाल में मुलाकात की बात को स्वीकार किया है।
कोबद ने पुलिस को जनवरी में बताया था कि वर्ष 2002 से 2006 के बीच उसने नेपाल के चार दौरे किए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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