बर्लिन फिल्म महोत्सव में सफल रही कोंकणी फिल्म : निर्देशक
मीनाक्षी शेडे
बर्लिन, 20 फरवरी (आईएएनएस)। बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कोंकणी फिल्म 'पाल्टाडाचो मुनिस' को सफलता मिलने के बाद नवोदित फिल्मकार लक्ष्मीकांत शटगांवकर बहुत रोमांचित हैं।
महोत्सव के 'इंटरनेशनल फोरम ऑफ न्यू सिनेमा' खंड में 'पाल्टाडाचो मुनिस' के छह प्रदर्शन हुए। इस खंड में नई और प्रयोगात्मक फिल्में दिखाई जा रही हैं।
शटगांवकर ने आईएएनएस से कहा, "बर्लिन में मेरी फिल्म को जो प्रतिक्रिया मिली उससे मैं बहुत प्रभावित हूं।"
उन्होंने कहा, "फिल्म के कुछ शो हाउसफुल थे। मेरी एक फ्रांसीसी जोड़े से मुलाकात हुई वे मेरी फिल्म दोबारा देखने के लिए जा रहे थे।"
शटगांवकर ने कहा कि यदि भारत में एक फिल्म दोबारा देखी जाए तो उसे सुपरहिट माना जाता है। इसलिए उन्हें लगता है कि बर्लिन ने उनकी फिल्म को सुपरहिट बना दिया है।
बर्लिन में नौ भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है। इनमें कोंकणी, मराठी, बांग्ला और हिंदी भाषा की फिल्में दिखाई जा रही हैं।
दो साल पहले सिद्धार्थ सिन्हा की भोजपुरी फिल्म 'उधेड़बुन' को बर्लिन में सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म की श्रेणी में सिल्वर बीयर पुरस्कार मिला था।
'पाल्टाडाचो मुनिस' गोवा के एक वन संरक्षक और एक विक्षिप्त महिला के बीच के संबंध की कहानी है। यह फिल्म राजनीतिक भ्रष्टाचार, पर्यावरण और समाज के पाखंडी मूल्यों पर भी टिप्पणी करती है।
शटगांवकर ने आईएएनएस को बताया, "यह फिल्म टोरंटो समारोह में दिखाई गई थी। यद्यपि वहां इसका गर्मजोशी से स्वागत हुआ था पर लोग इसे मनोरंजन के लिहाज से देखते थे जबकि बर्लिन में फिल्म से जुड़ी विभिन्न जानकारियों में रुचि ली गई।"
इस फिल्म का निर्माण राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) ने किया है। ग्यारह फरवरी से शुरू हुआ बर्लिन फिल्मोत्सव 21 फरवरी तक चलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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