हरियाणा में लिंग अनुपात सुधरा, पर 9 जिलों में स्थिति खराब
जयदीप सरीन
चण्डीगढ़, 19 फरवरी (आईएएनएस)। वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक देश में स्त्री-पुरुष अनुपात की सबसे खराब स्थिति हरियाणा में थी। इस असंतुलन को दूर करने में हरियाणा को आंशिक सफलता तो मिली, लेकिन पिछले एक वर्ष में यहां के नौ जिलों में जो लिंग अनुपात देखा गया है वह भयावह स्थिति है।
राज्य में वर्ष 2001 की जनगणना में प्राप्त लिंग अनुपात (सभी उम्र के लिए) में प्रति 1,000 पुरुषों पर 861 महिलाएं था। जबकि शून्य से छह वर्ष आयुवर्ग के लिए प्रति 1,000 पुरुषों पर 819 महिलाएं था। अक्टूबर 2009 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक लिंग अनुपात में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
अक्टूबर 2009 तक सभी 21 जिलों के जन्म प्रमाण के राज्य सरकार से मिले आंकड़े बताते हैं कि जन्म (0-6 वर्ष) के समय का लिंग अनुपात सुधर कर प्रति 1,000 पुरुषों पर 852 महिलाओं का हो गया है।
यद्यपि नौ जिलों के लिंग अनुपात में गिरावट देखी गई है। इनमें आर्थिक रूप से मजबूत जिले शामिल हैं।
वस्त्र, कालीन, अचार एवं अन्य उद्योगों के लिए मशहूर पानीपत जिले की स्थिति सबसे खराब है। यहां पर पिछले केवल एक साल के अंदर लिंग अनुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 857 (अक्टूबर 2008) से घटकर 830 (अक्टूबर 2009) महिलाओं पर पहुंच गया है।
चण्डीगढ़ से जुड़े पंचकुला जिले में ज्यादातर शहरी आबादी है। यहां अक्टूबर 2008 में महिलाओं का आंकड़ा 884 था जबकि अक्टूबर 2009 में यह आंकड़ा 871 पर पहुंच गया था।
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के गृह जिले रोहतक में अक्टूबर 2008 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 838 महिलाएं थीं जबकि अक्टूबर 2009 में यह आंकड़ा 827 पर पहुंच गया।
विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के गृह जिले में अक्टूबर 2008 में यह आंकड़ा 908 था जो अक्टूबर 2009 में 890 हो गया था।
वर्ष 2008 से 2009 के बीच जिन अन्य जिलों की स्थिति खराब रही उनमें भिवानी, जींद, करनाल, मेवात और सोनीपत शामिल हैं।
इसके विपरीत अपेक्षाकृत गरीब जिले झज्जर में अक्टूबर 2008 में लिंग अनुपात 793 से बढ़कर अक्टूबर 2009 में 833 पर पहुंच गया।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने मादा भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें गैरकानूनी तौर पर लिंग निर्धारण करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापे डाले जा रहे हैं और जिन गांवों में लिंग अनुपात में सुधार देखा जा रहा है वहां की ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया जा रहा है।
रोहतक जिले के पिलाना गांव में लिंग अनुपात में सबसे अधिक सुधार देखा गया है। यहां वर्ष 2008 में प्रति 1,000 लड़कों पर 1,176 लड़कियां थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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