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महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी भाजपा (राउंडअप)

इंदौर, 19 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने कार्यकर्ताओं से पिछले आम चुनाव में हुई हार के गम को भुलाकर नए नेतृत्व में नए जोश के साथ महंगाई, कश्मीर सहित राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने का फैसला किया है।

यहां 'ग्रामीण परिवेश' में संपन्न तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं से गांव जाने, दलित समुदाय तक पहुंच बढ़ाने और पार्टी हित को निजी महत्वाकांक्षा से ऊपर रखने की नसीहत देते हुए पार्टी में अनुशासन और एकजुटता कायम करने का आह्वान किया।

हार से न हारें कार्यकर्ता : आडवाणी

आडवाणी ने अधिवेशन के समापन मौके पर अपनी पारी खत्म होने के कयासों को एक बार फिर खारिज करते हुए कहा कि पिछले आम चुनाव में पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान इस सार्वजनिक छवि ने पहुंचाया कि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता नहीं है।

उन्होंने पार्टी के भीतर एकता और अनुशासन फिर से लाने का आह्वान करते हुए कहा, "एक समय था जब एकता और अनुशासन हमारी पार्टी की प्रमुख शक्ति मानी जाती थी। हमें इस परंपरागत शक्ति को फिर से पाना होगा।"

आडवाणी ने कार्यकर्ताओ का आह्वान किया कि चुनाव में मिली हार से न तो निराश हों और न हताश, इस एक हार से वे हारें नहीं।

आडवाणी ने कहा कि 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली हार से विश्वास की झलक कम होना एक अच्छे कार्यकर्ता का लक्षण नहीं है। उन्होंने 1970 में पार्टी की स्थिति और उसके बाद लोकसभा में दो सीटें मिलने का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा में अनेक घटनाएं देखी हैं इसलिए पिछले चुनाव में मिली हार से हताश और निराश नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महंगाई और कश्मीर के मुद्दे पर आगामी सत्र में केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने में पार्टी पीछे नहीं रहेगी। कश्मीर को लेकर केंद्र द्वारा अपनाई जा रही नीति को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि शब्बीर अहमद समिति की रिपोर्ट के आधार पर 1953 से पहले की स्थिति में कश्मीर को लाने की कोशिश देश के लिए घातक है, ऐसा होने का मतलब है एक देश के दो विधान, दो निशान और दो राष्ट्रपति होंगे। इसे लागू करने की कोशिश हुई तो सरकार को जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ेगा।

आडवाणी ने अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व को पार्टी के लिए एक नए और सकारात्मक दौर की शुरुआत बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत 1942 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सदस्यता के साथ की थी जो अब भी जारी है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि गडकरी का यह कहना सही है कि निजी महत्वाकांक्षाओं का स्थान सदैव पार्टी के लक्ष्य और निर्णयों के बाद होना चाहिए।

पिछले वर्ष हुए संसदीय चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि जनादेश न पाने की निराशा स्वाभाविक है, लेकिन हमने पराजय को एक परिपक्व पार्टी के रूप में स्वीकार किया है।

उन्होंने कहा कि इस हार से सबक सीखते हुए हम आगे बढ़ेंगे। हार और जीत लोकतंत्र को दो पहलू हैं। इससे हमें सुधारात्मक कदम उठाते हुए आगे बढ़ना होगा।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि नितिन गडकरी के युवा नेतृत्व में पार्टी के जीवन में एक नए और सकारात्मक दौर की शुरुआत हुई है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता और सद्भाव के निर्माण के लिए तीन और चीजों पर ध्यान देना होगा, जिससे कि अगले संसदीय चुनाव में भाजपा एक गंभीर दावेदार के रूप में उभर सके।

उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने भौगोलिक और सामाजिक आधार को बढ़ाने के साथ गठबंधन के निर्माण और प्रबंधन की क्षमता को विकसित करना होगा।

आडवाणी ने कहा कि तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्टी के बारे में लोगों को लगना चाहिए कि वह सुशासन, स्वच्छ राजनीति और विकास के मामले में कांग्रेस से कहीं बेहतर है।

बड़े नेताओं को भी गांव में काम करना होगा : गडकरी

गडकरी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि अब हवा-हवाई से काम नहीं चलेगा, नेता कितना भी बड़ा हो उसे गांव में जाकर काम करना ही होगा।

इंदौर में राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रस्तावों को पारित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को दिल्ली के चक्कर काटने की जरूरत नहीं हैं। कार्यकर्ता हो या नेता उसे गांव में काम करना होगा। इतना ही नहीं किसी के कहने पर चुनाव में टिकट नहीं दिए जाएंगे।

उन्होंने आगामी कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि अंत्योदय समिति और प्रशिक्षण योजना बनाई जाएगी। महंगाई के खिलाफ एक मार्च से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। 21 अप्रैल को महंगाई को लेकर संसद पर प्रदर्शन होगा।

केंद्र ने लोगों का निवाला छीनने का पाप किया : सुषमा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई ने आम आदमी के मुंह से निवाला छीनने का पाप किया है।

राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन सुषमा स्वराज ने केंद्र की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने एनडीए सरकार के शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि चार आपदाओं का सामना करने के बाद भी आम आदमी को उनकी सरकार ने महंगाई से दूर रखा था और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को ठीक किया था। वहीं संयुक्त प्रगतिशाील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने ठीक उलटा काम किया है, दाम बढ़ाए हैं और कोटा कम किया है।

उन्होंने आगे कहा कि भूख पर प्रहार भाजपा की सरकारें कर रही हैं और किसानों को बोनस भी दे रही है। इतना ही नहीं सस्ता अनाज दिया जा रहा हैं। मध्य प्रदेश सरकार संवेदनशील है तो गुजरात सरकार विकास का मॉडल है।

महंगाई के लिए केंद्र की गलत नीतियां जिम्मेदार : सिन्हा

भाजपा ने देश में बढ़ती महंगाई के लिए वायदा बाजार के साथ केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि इस महंगाई ने देश के आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है। उन्होंने कहा, "अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जब देश के वित्त मंत्री हुआ करते थे तब देश की महंगाई दर बढ़कर दहाई पर पहुंच गई थी और अब प्रधानमंत्री है तब भी यही हाल है। "

सिन्हा ने महंगाई के लिए वायदा बाजार को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का वायदा बाजार हुआ है, जबकि वास्तविक रूप से एक प्रतिशत सामान की ही आपूर्ति हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में नेतृत्व और तालमेल का अभाव है।

गंगा की सफाई पर श्वेत-पत्र जारी हो : भाजपा

भाजपा ने गंगा की सफाई पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए इसके शुद्धिकरण के लिए पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की घोषणा की है।

इंदौर में आयोजित भाजपा के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन शुक्रवार को गंगा- यमुना शुद्धिकरण अभियान पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस काम में सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि गंगा मैली ही है। दो चरणों में हुए सफाई कार्य के दौरान काफी भ्रष्टाचार हुआ है। सरकार को इस पर श्वेत पत्र लाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन नदियां खत्म हो जाएंगी देश भी खत्म हो जाएगा। राजनाथ ने ब्रिटेन और अमेरिकी की टेम्स व पोटोमैक नदियों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की सरकारों ने इनकी सफाई सफलतापूर्वक करवाई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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